जयपुरः राजस्थान पुलिस ने अपराध नियंत्रण, साइबर सुरक्षा और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में पिछले छह महीनों की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए भविष्य की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है. महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब पुलिस का फोकस केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपराध की रोकथाम, संगठित अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने और आधुनिक तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग पर रहेगा.
डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज कुल अपराधों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 4.65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट आई है. एससी-एसटी एक्ट के मामलों में भी करीब 19 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है, जिसे प्रभावी कानून-व्यवस्था का परिणाम बताया गया.संपत्ति संबंधी अपराधों में भी राजस्थान पुलिस ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. लूट के मामलों में बरामदगी का प्रतिशत 71 से बढ़कर 79 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि नकबजनी में बरामदगी 10 प्रतिशत से भी कम स्तर से बढ़कर 58 प्रतिशत से अधिक हो गई. चोरी के मामलों में भी रिकवरी में बड़ा सुधार दर्ज किया गया.नशे और अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों के तहत एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के मामलों में बढ़ी कार्रवाई से बड़े ड्रग नेटवर्क और अपराध सिंडिकेट्स पर प्रभावी प्रहार किया गया है. डीजीपी ने कहा कि अब बड़े ड्रग माफिया और संगठित अपराधियों की अपराध से अर्जित संपत्तियों को कुर्क और जब्त करने की कार्रवाई और तेज की जाएगी.
महिला सुरक्षा को लेकर भी पुलिस ने बेहतर प्रदर्शन का दावा किया. छेड़छाड़, दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में कमी आने के साथ-साथ अनुसंधान की अवधि भी काफी घटाई गई है. ऑपरेशन गरिमा, ऑपरेशन खुशी, कालिका पेट्रोल, एंटी रोमियो स्क्वॉड और सुरक्षा सखी जैसी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है.साइबर अपराधों के मोर्चे पर भी राजस्थान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां गिनाईं. प्रदेश के सभी 41 पुलिस जिलों में साइबर थाने स्थापित किए जा चुके हैं और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क संचालित है. साइबर हेल्पलाइन 1930 को मजबूत किया गया है तथा साइबर अपराधों में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी राशि होल्ड कर पीड़ितों को राहत दिलाई गई. सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 1.84 लाख गुम मोबाइल ट्रेस किए गए, जिनमें से 61 हजार से अधिक मोबाइल उनके मालिकों को लौटाए जा चुके हैं.डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) और एआई आधारित 1930 कॉल सेंटर की स्थापना प्रक्रियाधीन है, जिससे साइबर अपराधों पर और प्रभावी नियंत्रण संभव होगा.प्रेस कॉन्फ्रेंस में भविष्य की रणनीति साझा करते हुए डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि रंगदारी, गैंगवार और संगठित अपराध के खिलाफ एजीटीएफ, एटीएस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे. आवश्यकता पड़ने पर विदेशों में छिपे अपराधियों के प्रत्यर्पण की कार्रवाई भी की जाएगी. उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस का लक्ष्य अपराध पर त्वरित नियंत्रण के साथ अपराधियों की आर्थिक ताकत को खत्म कर प्रदेश में सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना है.