जयपुर: राजस्थान में कार्रवाई करने पहुंची यूपी पुलिस की साइबर क्राइम टीम खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में फंस गई है. एसीबी की FIR में अयोध्या साइबर क्राइम थाने से जुड़े चार पुलिसकर्मियों पर 2 लाख 80 हजार की रिश्वत लेने का आरोप है. आरोप है कि साइबर क्राइम केस में फंसे युवक का नाम हटाने के एवज में पहले 4 लाख की रिश्वत मांगी गई, फिर 2.80 लाख में सौदा तय हुआ. एसीबी ने रिश्वत मांग का सत्यापन किया और इसके बाद ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया.
सीकर निवासी दिनेश मीणा ने एसीबी के सामने शिकायत दी. शिकायत के मुताबिक उनके भाई विकास मीणा के खिलाफ अयोध्या साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 22/2024 में कार्रवाई चल रही थी. आरोप है कि मामले को रफा-दफा करने और भाई का नाम हटाने के एवज में 4 लाख की रिश्वत मांगी गई. शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने रिश्वत मांग के सत्यापन की कार्रवाई शुरू की. एसीबी के दस्तावेज के मुताबिक परिवादी की आरोपी पुलिसकर्मी से मोबाइल पर बातचीत हुई.
इसके बाद उसे अखेपुरा टोल के पास आने को कहा गया. बाद में मुलाकात होटल श्रवण पैलेस में हुई. एसीबी ने डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर के जरिए बातचीत को रिकॉर्ड किया. रिकॉर्डिंग की जांच में रिश्वत लेनदेन की पुष्टि होने का उल्लेख FIR में किया गया है. FIR के मुताबिक रिश्वत मांग सत्यापन के दौरान ₹4 लाख की मांग सामने आई. इसके बाद ₹2 लाख 80 हजार लेने पर सहमति बनी. 18 अगस्त 2026 को आरोपी पुलिसकर्मियों ने क्रेटा गाड़ी के अंदर बैठकर परिवादी से ₹2.80 लाख लिए. इस मामले में अयोध्या साइबर क्राइम थाने के चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.
चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज:
यसवंत सिंह — उप निरीक्षक, नागरिक पुलिस
सोहनलाल — कांस्टेबल
पवन कुमार त्रिपाठी — कांस्टेबल
गौरव चारग — कांस्टेबल
एसीबी की कार्रवाई में रिश्वत की रकम के रूप में 90 हजार असली भारतीय मुद्रा और 1 लाख 90 हजार डमी नोट का इस्तेमाल किया गया, कुल रकम ₹2 लाख 80 हजार रखी गई.कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिसकर्मियों को पकड़कर पूछताछ की गई और पूछताछ के बाद एसीबी ने चारों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया. इस पूरे ऑपरेशन में डिजिटल वॉयस रिकॉर्डिंग को अहम सबूत के तौर पर सामने रखा गया है. FIR में बताया गया है कि रिश्वत लेनदेन के दौरान हुई मोबाइल और आमने-सामने की बातचीत रिकॉर्ड की गई. डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर के मेमोरी कार्ड को सुरक्षित रखा गया और बाद में कार्रवाई में शामिल अधिकारियों एवं स्वतंत्र गवाहों के समक्ष इसकी प्रक्रिया की गई.
सीकर में एसीबी की इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे से जुड़े भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले को उजागर किया है.सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस पुलिस टीम पर कानून लागू कराने की जिम्मेदारी थी, उसी पर कानून से इतर रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं. यूपी से राजस्थान पहुंची साइबर क्राइम पुलिस टीम पर रिश्वतखोरी के आरोप ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है. 4 लाख की कथित मांग से शुरू हुआ मामला ₹2.80 लाख के लेनदेन तक पहुंचा और फिर एसीबी की कार्रवाई में चार पुलिसकर्मी एसीबी की गिरफ्त में आ गए. अब जांच में यह साफ होगा कि रिश्वत का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था और इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे.