जयपुर: राजस्थान सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पेश किया.इसके साथ ही राजस्थान उन राज्यों में शुमार हो गया. जहां समान नागरिक संहिता का कानून होगा.403 धाराओं वाले इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है.विधेयक में सीएम भजन लाल शर्मा का संदेश निहित है.सीएम भजन लाल शर्मा ने कहा है UCC के जरिए लिव इन रिलेशन के पार्टनरों के अधिकारों को सक्रिय रूप से संरक्षित किया जा सके और संबंधों से जन्मे बालकों का धर्मजत्व सुनिश्चित किया जा सके.
राजस्थान भी UCC लाने वाले बीजेपी के सत्ताधारी राज्यों में शुमार हो गया. राजस्थान विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पेश किया गया.इसका उद्देश्य इन विषयों से जुड़े अलग-अलग कानूनों, प्रथाओं और परंपराओं की जगह एक समान व्यवस्था लागू करना है प्रस्तावित कानून पूरे राजस्थान के साथ राज्य के बाहर रहने वाले राजस्थान के निवासियो पर भी लागू होगा.विधेयक में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का संदेश निहित है.
UCC बिल में CM का संदेश:
राजस्थान राज्य अपने समस्त नागरिकों के लिए स्वीय विधियाँ में समता, न्याय और एकरूपता सुनिश्चित करने के सर्वोपरि महत्व को मान्यता देता है.इस दृष्टि से व्यापक विधायन का अधिनियमन अनिवार्य है.जो न केवल विवाह, विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार और लिव- इन रिलेशनशिप से संबंधित विधियों मे सामंजस्य स्थापित करें.अपितु अधिक साम्यापूर्ण और सुरक्षित सामाजिक पर्यावरण को भी प्रोत्साहित कर सके.प्रस्तावित विधेयक की प्रमुख विशेषताओं में एक एकीकृत विधिक की स्थापना सम्मिलित है. जो विविध रूढिगत परिपाटियो से परे हो, जो विधिमान्य विवाहों के लिए शर्तें, विवाह विच्छेद के आधारों और भरण-पोषण के अधिकारों के मानकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाएगा.यह संहिता संविधान द्वारा प्रत्याभूत अनुसूचित जनजातियों और अन्य विशिष्ट समूहो के संरक्षित रूढिगत अधिकारों को सावधानीपूर्वक संरक्षित रखते हुए राजस्थान के समस्त निवासियो पर लागू होती है.
इस विधेयक का उद्देश्य पंथ निरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को बनाए रखना है जिससे समाज की एकता एवं अखण्डता को सुदृढ किया जा सके.यह विधेयक संहिता के प्रशासनिक कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन को सुकर बनाने के लिए एक महारजिस्ट्रार और स्थानीय रजिस्ट्रारों की नियुक्ति की रूपरेखा प्रस्तुत करता है. इसके अतिरिक्त यह राज्य सरकार को रजिस्ट्रीकरण प्रक्रिया को सरल और कारगर बनाने के लिए और अभिलेखों का पारदर्शी रख-रखाव सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रानिक रजिस्टरों और अभिहित वेब पोर्टलों की स्थापना करने के लिए सशक्त करता है.यह विधायन सामाजिक सुरक्षा और वैयक्तिक अधिकारों में और वृद्धि करने के लिए आजापक अध्युपायों जैसे विवाहों और विवाह-विच्छेद की डिक्रियो के अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण को पुरः स्थापित करता है.
यह संपदाओं के उचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए दोनों निर्वसीयती और वसीयती उत्तराधिकार के लिए स्पष्ट, मानकीकृत नियमो की स्थापना करता है.यह विधेयक व्यष्टियों पर इन जीवन घटनाओं को आधिकारिक रूप से रजिस्टर करने का उत्तरदायित्व अधिरोपित करता है और विवादों के सौहार्दपूर्ण समझौते को प्रोत्साहित करने के लिए वाद-पूर्व मध्यस्थता आदेशित करता है.
साथ ही साथ यह विधेयक लिव-इन रिलेशनशिप के पार्टनरों से उनके रिलेशनशिप का एक औपचारिक कथन रजिस्ट्रार को प्रस्तुत करने की अपेक्षा करते हुए आधुनिक सामाजिक गतिशीलता को इंगित करता है.जिससे पार्टनरों के अधिकारों को सक्रिय रूप से संरक्षित किया जा सके और ऐसा संबंधो से जमे बालकों का धर्मजत्व सुनिश्चित किया जा सके. यह विधेयक रजिस्टर करने में असफल रहने, मिथ्या जानकारी प्रस्तुत करने या कपट, बल या प्रपीड़न के माध्यम से सम्मति अभिप्राप्त करने के लिए कठोर शास्तियों और कारावास को सम्मिलित करते हुए इसके अननुपालन से निपटने के लिए एक सुदृढ तंत्र की भी स्थापना करता है.यह विधेयक पूर्वोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए ईप्सित है.
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि विधेयक में विवाह के लिए समान शर्तें निर्धारित की गई हैं.किसी भी पक्ष का जीवित जीवनसाथी होने पर दूसरा विवाह नहीं किया जा सकेगा.पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष ही रहेगी.विवाह धार्मिक या मान्य प्रथागत रीति-रिवाजों के अनुसार किया जा सकेगा, लेकिन उसका पंजीकरण अनिवार्य होगा.संहिता लागू होने के बाद होने वाले विवाहों के लिए सामान्यतः 60 दिन के भीतर पंजीकरण ज्ञापन प्रस्तुत करना होगा.पंजीकरण नहीं कराने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.नोटिस के बाद भी अनुपालन नहीं करने पर यह जुर्माना बढ़कर 25 हजार रुपये तक हो सकता है.सरकार विवाह पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार जनरल, स्थानीय रजिस्ट्रार, इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था कर सकेगीतलाक के लिए समान आधार विधेयक में तलाक के लिए समान आधार तय किए गए हैं .
इनमें व्यभिचार, क्रूरता, दो साल तक परित्याग, धर्म परिवर्तन, कुछ निर्धारित मानसिक या शारीरिक स्थितियां,
संन्यास लेना, सात साल तक लापता रहना और भरण-
पोषण संबंधी आदेश का उल्लंघन शामिल हैं आपसी
सहमति से तलाक का भी प्रावधान है इसके लिए पति-
पत्नी का कम से कम एक साल से अलग रहना और विवाह समाप्त करने पर दोनों की सहमति जरूरी है
विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर है.संबंध को पुरुष और महिला के साझा घर में विवाह जैसी प्रकृति में साथ रहने के रूप में परिभाषित किया गया है ऐसे जोड़ों को रजिस्ट्रार के समक्ष संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित घोषणा प्रस्तुत करनी होगी.संबंध समाप्त होने की स्थिति मे उसकी सूचना और पंजीकरण का भी प्रावधान है लिव-इन रिलेशनशिप से जमाने बच्चों को दंपती की वैध संतान माना जाएगा. यदि कोई जोड़ा एक माह से अधिक समय तक आवश्यक घोषणा दिए बिना लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो तीन महीने तक की जेल और / या 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.