राजस्थान की सियासत में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी, निकायों में 102 प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः पंचायत की चौपाल से लेकर शहर के वार्ड तक राजस्थान में महिलाओं के लिए राजनीतिक मैदान पहले से ज्यादा खुला है. इस बार 26 अगस्त को महिला समानता दिवस ऐसे समय आया है, जब राज स्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच आरक्षण की लॉटरी ने हजारों महिलाओं के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता तैयार किया है. मौजूदा चुनावी दौर में निकाय प्रमुख पर सबसे अधिक महिलाएं ही बैठी हुई नज़र आ सकती है.

सिर्फ पार्षद पदों तक ही महिला प्रतिनिधित्व सीमित नहीं है. 309 नगरीय निकायों के प्रमुख पदों में 102 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं. लगभग एक-तिहाई निकायों की कमान महिलाओं के हाथ में जा सकती है. 10 नगर निगमों के महापौर पदों में भी महिलाओं की स्थिति अहम है. 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में करीब 3,356 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है. 41 जिला परिषदों में 20 जिला प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं, लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है कि क्या आरक्षित सीट पर जीतने वाली महिला अपने फैसले खुद ले पाएगी? गांवों में आज भी कई जगह निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के फैसलों में परिवार के पुरुषों की भूमिका चर्चा में रहती है. नगरीय निकाय चुनाव में इस बार महिला राजनीतिक भागीदारी का सबसे स्पष्ट आंकड़ा सामने आया है. यूं कहे तीन में से एक वार्ड महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है. इसका सीधा असर भाजपा और कांग्रेस दोनों की टिकट रणनीति पर पड़ना तय है. जिन वार्डों में आरक्षण बदल गया है, वहां वर्षों से तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों को अब नए राजनीतिक विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं. जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 50 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं. इनमें अलग-अलग श्रेणियों की महिला सीटें शामिल हैं. यह स्थिति राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण है, अब टिकट मांगने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है

बढ़ने की संभावना है. पार्टी के सामने सवाल होगा कि टिकट केवल किसी पुरुष नेता के परिवार की महिला सदस्य को दिया जाए या लंबे समय से संगठन में सक्रिय महिला कार्यकर्ता को भी मौका मिले.

..आरक्षण प्रक्रिया के बाद छह नगर निगमों के महापौर पद महिलाओं के लिए आरक्षित 
.. कोटा में ओबीसी महिला के लिए पद आरक्षित है, जबकि अलवर, अजमेर, भीलवाड़ा और भरतपुर जैसे निगमों में सामान्य महिला वर्ग के लिए महापौर पद आरक्षित
 ..जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के महापौर पद सामान्य रखे गए हैं.      

महिला समानता दिवस का संदेश यही है कि महिलाओं को आरक्षण के जरिए सत्ता में हिस्सेदारी के साथ समाज में सम्मान, सुरक्षा और निर्णय की स्वतंत्रता भी मिले और सियासत में पर्याप्त अवसर. जयपुर नगर निगम में बीजेपी ने पिछले टर्म में लगातार दो महिला मेयर दिए सौम्या गुर्जर और कुसुम यादव.