VIDEO: टिकट के बाद अब प्रचार सामग्री की बारी, जयपुर के बाजारों में सजी चुनावी प्रचार सामग्री की दुकानें, झंडे-बैनर से लेकर टोपी-दुपट्टे तक डिमांड

जयपुर: राजस्थान में निकाय चुनाव का सियासी रंग अब जयपुर के बाजारों में भी नजर आने लगा है. नामांकन के बाद प्रत्याशियों ने प्रचार तेज कर दिया हैं. राजधानी में प्रचार सामग्री की दुकानें सज चुकी हैं और उम्मीदवारों व उनके समर्थकों की इन दुकानों पर भीड़ भी बढ़ने लगी है. कोई झंडे-बैनर बनवा रहा है, तो कोई पोस्टर, पर्चे और प्रचार सामग्री के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की तैयारी में है. यानी टिकट की जंग खत्म होते ही अब प्रचार की जंग शुरू हो गई है. 

टिकट की जंग खत्म, अब प्रचार की जंग शुरू
जयपुर के बाजारों में चढने लगा चुनावी रंग
पोस्टर से पर्चे तक... वोट की पूरी तैयारी
किसका प्रचार रंग लाएगा, किसका रह जाएगा फीका?
दीवारों से लेकर वार्ड तक... प्रचार का शोर
एक-एक वोट के लिए प्रचार में जोर

नामांकन के बाद अब मैदान में प्रचार का शंखनाद
-कहीं झंडे तैयार हो रहे हैं, तो कहीं पोस्टर और बैनर की बड़ी डिमांड
-प्रत्याशियों के समर्थक दुकानों पर पहुंचकर कर रहे हैं ऑर्डर
-चेहरे से लेकर चुनाव चिन्ह तक वोटर्स तक पहुंचाने की कवायद
-बैनर, टोपी व दुपट्टे पर सबसे ज्यादा फोकस है प्रत्याशियों का
-स्थानीय चुनाव होने से भाजपा व कांग्रेस की प्रचार सामग्री ज्यादा बिक रही
-निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद प्रचार सामग्री खरीदेंगे

जयपुर की संसारचंद्र रोड पर इन दिनों चुनावी प्रचार सामग्री की दुकाने सजी हुई हैं. लाउड स्पीकर से लेकर लाठियां तक बिक रही है,,,हाथ के चिन्ह से लेकर कमल के फूल वाले निशान बिक रहे हैं. आप पार्टी व बसपा की चुनावी प्रचार सामग्री भी काउंटर पर सजी हुई है. कुछ प्रत्याशी अपने अनुसार गाने रिकॉर्ड भी करा रहे हैं. दरअसल निकाय चुनाव में एक-एक वोट की कीमत समझते हुए प्रत्याशी प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.टिकट पाने के बाद अब अगली चुनौती है—अपनी पहचान को वोट में बदलना. किसी का फोकस वार्ड के हर कोने तक पहुंचने पर है, तो कोई बड़े-बड़े बैनर से माहौल बनाने की तैयारी में है. यानी सियासत के मैदान में मुकाबला सिर्फ भाषणों का नहीं, पोस्टर और प्रचार सामग्री का भी होने वाला है.

कुल मिलाकर नामांकन के बाद जयपुर में चुनावी बाजार भी गरम है. नेताओं के चेहरे अब सिर्फ सियासी बयानों में नहीं, बाजार की प्रिंटिंग मशीनों पर भी नजर आने लगे हैं. अब देखना होगा-किसका प्रचार रंग लाता है और किसका प्रचार सिर्फ दीवारों तक ही सीमित रह जाता है. हालांकि लोकसभा व विधानसभा चुनावों में दलों के बड़े नेताओं की फोटो वाले पोस्टर व कटआउट की डिमांड होती है, लेकिन पार्षद के चुनाव में स्थिति थोड़ी अलग है. उम्मीदवारों के पास खर्चा करने की सीमा भी काम कम है, लेकिन फिर भी गाडि़यों में प्रचार सामग्री लादकर अब ये कार्यकर्ता व प्रत्याशी मतदाताओं रिझाने में जुट गए हैं.