बाल वाहिनी वाहनों पर परिवहन विभाग की सख्ती, जोबनेर हादसे के बाद राजस्थान में जांच अभियान शुरु, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाले बाल वाहिनी वाहनों की सुरक्षा को लेकर राजस्थान परिवहन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है. 8 अगस्त को जोबनेर में हुए स्कूल वाहन हादसे के बाद विभाग ने प्रदेश के सभी RTO और DTO को बाल वाहिनी वाहनों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं

परिवहन विभाग के निर्देशों के तहत राज्य के हर शैक्षणिक संस्थान से जुड़े बाल वाहिनी वाहनों की जांच की जाएगी. इसमें केवल स्कूल के नाम पर पंजीकृत वाहन ही नहीं, बल्कि स्कूलों से अनुबंध के आधार पर बच्चों को परिवहन करने वाले वाहन भी शामिल होंगे. यानी पंजीकृत और अनुबंधित दोनों तरह के स्कूल वाहनों की जांच अनिवार्य होगी.विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक बाल वाहिनी वाहन की जांच के लिए परिवहन निरीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. निरीक्षक निर्धारित प्रपत्र के अनुसार वाहनों की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वाहन बाल वाहिनी के लिए तय सुरक्षा मानकों और मोटरयान नियमों के अनुरूप है या नहीं.विशेष अभियान के दायरे में बाल वाहिनी के रूप में संचालित होने वाले विभिन्न श्रेणी के वाहन आएंगे. इनमें ऑटो, टैक्सी, टाटा मैजिक, बस और मिनी बस शामिल हैं. जांच के दौरान वाहनों के दस्तावेजों के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि वे बच्चों के परिवहन के लिए निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं. खास तौर पर ऐसे वाहनों पर नजर रखी जाएगी, जो बिना वैध अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया के अवैध रूप से बाल वाहिनी के रूप में संचालित किए जा रहे हैं. ऐसे वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

विभाग ने केवल एक बार की जांच तक अभियान सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए हैं. अवैध रूप से संचालित बाल वाहिनियों की रोजाना नियमित जांच की जाएगी. RTO और DTO स्तर पर अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.    

जांच अभियान की मॉनिटरिंग के लिए भी परिवहन विभाग ने व्यवस्था तय की है. अधिकारियों को हर दिन की गई कार्रवाई की जानकारी गूगल शीट पर अपडेट करनी होगी. इससे प्रदेशभर में बाल वाहिनी वाहनों की जांच, सामने आई कमियों और की गई कार्रवाई की नियमित निगरानी की जा सकेगी.जोबनेर हादसे के बाद परिवहन विभाग का यह अभियान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सीधे तौर पर इन वाहनों की फिटनेस, दस्तावेजों और निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन से जुड़ी है. अब विभाग का फोकस केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय बाल वाहिनी वाहनों की पहले से पहचान, नियमित जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर रहेगा. ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेशभर में नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल वाहनों पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है.