VIDEO: अब बागी बने चुनौती ! नामांकन के बाद कई जगह बागियों से परेशान कांग्रेस, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस ने टिकट वितरण में तो अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन अब असली चुनौती बागियों की बगावत से पार पाने की है.  पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने टिकट वितरण को लेकर लंबी कवायद की, दावेदारों से फीडबैक लिया और समीकरण साधने की कोशिश की, लेकिन टिकटों के ऐलान के साथ ही कई जगह विरोध के सुर भी सुनाई देने लगे हैं. अब कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि अपने ही बागियों को मनाने की भी है. 

शहरी सरकार के चुनाव में कांग्रेस ने बिछाई बिसात
-10 हजार से अधिक वार्डों के लिए उम्मीदवार चुने गए
-इस बार पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा ने संगठन को झोंका टिकट वितरण में
-टिकट वितरण को महज नामों की सूची तय करने तक सीमित नहीं रखा
-डोटासरा ने संगठन के पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां दी
-जिला प्रभारी व विधानसभा पर्यवेक्षक भेजकर स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया
-जिताऊ चेहरों की तलाश में मैराथन बैठकों में लंबी माथापच्ची हुई
-डोटासरा की अगुवाई में कांग्रेस ने टिकटों को लेकर खूब मंथन किया
-स्थानीय समीकरण, संगठन की पकड़ और चुनावी जीत के बीच संतुलन बनाने का प्रयास
-इस बार कांग्रेस की रणनीति में युवा चेहरे खास तौर पर दिखाई दिए
-पार्टी ने नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का संदेश दिया, 50 फीसदी टिकट युवाओं को दिए
-लेकिन टिकट की घोषणा के बाद कहानी का दूसरा अध्याय शुरू हुआ
-जिन्हें टिकट नहीं मिला… उनमें से कई ने बगावत का रास्ता पकड़ लिया
-बागी प्रत्याशी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के सामने चुनौती बन गए हैं

पिछले पांच साल से पीसीसी चीफ के रूप में काम कर रहे डोटासरा पर आलाकमान का आशीर्वाद है, तो खुद डोटासरा ने टिकट वितरण में खूब मेहनत की, लेकिन अब उनकी रणनीति की असली परीक्षा चुनाव मैदान में होगी. कांग्रेस के सामने चुनौती है कि नाराज दावेदारों को कैसे साधा जाए. स्थानीय नेताओं को एकजुट कैसे रखा जाए. और टिकट कटने से नाराज कार्यकर्ताओं को पार्टी प्रत्याशी के पीछे कैसे खड़ा किया जाए. टिकट वितरण को लेकर कुछ जगहों पर विवाद भी सामने आए हैं, स्थानीय स्तर पर विरोध भी है, तो कुछ जगह कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है. भीलवाड़ा का उदाहरण भी सामने हैं, जहां नेताओं के आपसी विवाद ने सिंबल ही नहीं देने दिए. 

कुल मिलाकर इन सबने कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. निकाय चुनाव में मुकाबला सिर्फ बीजेपी से नहीं है बल्कि कई वार्डों में कांग्रेस को अपनों से भी मुकाबला करना पड़ सकता है. अगर नाराज दावेदार मान गए तो कांग्रेस की रणनीति मजबूत होगी. और अगर बागी मैदान में डटे रहे तो कई वार्डों में कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है. यानी टिकट की बाजी खत्म अब बागियों को साधने की चुनौती शुरू. अब कांग्रेस को एक बार फिर उन नेताओं को बागियों को मनाने की जिम्मेदारी देनी चाहिए, जिन्होंने टिकट बांटकर जितवाने का दावा किया था.