हिमालय में खतरे की घंटी ! बाढ़ नहीं... ग्लेशियर संकट का बड़ा अलार्म, पर्यावरण संगठनों ने इसे महज प्राकृतिक आपदा मानने से किया साफ इनकार

हिमालय में खतरे की घंटी ! बाढ़ नहीं... ग्लेशियर संकट का बड़ा अलार्म, पर्यावरण संगठनों ने इसे महज प्राकृतिक आपदा मानने से किया साफ इनकार

जयपुरः नेपाल-तिब्बत त्रासदी में मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है. तबाही के बाद से ही हजारों अब भी लापता है. ग्लेशियर टूटने से बर्फ, चट्टान और मलबे ने तबाही ने विकराल रूप लिया है. पर्यावरण संगठनों ने इसे महज प्राकृतिक आपदा मानने से साफ इनकार किया है. जलवायु परिवर्तन और बेतरतीब निर्माण से हिमालयी जोखिम बढ़ने की चेतावनी दी है. भारत में 189 हाई रिस्क ग्लेशियल झीलें, करीब 56 बेहद संवेदनशील चिन्हित है. सिक्किम GLOF और चमोली आपदा को भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माना है.     

NAPM, NACEJ और AIRF की हिमालयी देशों से साझा निगरानी की मांग की है. ग्लेशियर, झील, ढलान और नदियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग पर जोर दिया है. नेपाल, भारत, तिब्बत और चीन के बीच तत्काल डेटा साझेदारी की मांग की है. खतरनाक इलाकों में नई परियोजनाओं और बस्तियों की समीक्षा पर बल. स्थानीय समुदायों को चेतावनी, निकासी और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण देने की अपील. संगठनों का साफ संदेश है कि हिमालय को विकास नहीं, सुरक्षित और संतुलित विकास चाहिए.