जयपुर : गोवंश के चारे-पानी के संकट को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राजस्थान सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में गोवंश भूख और प्यास से मर रहा है और राज्य सरकार केवल घोषणाएं कर निश्चिन्त बैठी है. अखबार सूखे और अकाल की खबरों से भरे हुए हैं.
30 सितंबर को मुख्यमंत्री ने बाड़मेर में चारा डिपो खोलने की घोषणा की थी. 8 दिन बाद भी न कोई चारा डिपो खुला, न पशु शिविर. गडरारोड में स्थानीय प्रशासन कह रहा है कि 23 पटवार मंडलों में चारा डिपो के प्रस्ताव प्रस्ताव भेजे हैं, पर मंजूरी नहीं मिली. प्रशासन आचार संहिता की आड़ ले रहा है.
जबकि सवाल यह है कि सूखा साफ दिख रहा था तो आचार संहिता से पहले तैयारी क्यों नहीं हुई, और राहत के लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति क्यों नहीं मांगी गई? ग्रामीणों के अनुसार दर्जनों गांवों में गायें मर चुकी हैं, गायें प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हैं, चारा तीन गुना महंगा हो गया है और जमाखोरी की शिकायतें हैं.
गौशालाओं को सरकार रोज बड़े पशु के लिए 50 रुपए देती है, जबकि संचालकों के मुताबिक खर्च 100 से 150 रुपए है. गौशालाओं का अनुदान भी समय पर नहीं मिल पा रहा. हालत यह है कि खुद भाजपा के जैसलमेर विधायक तक सरकार से तुरंत सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं पर सरकार के कोई सुनवाई नहीं कर रही है.
गाय के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार जवाब दे, गोवंश कब तक चारे-पानी को तरसेगा? मुख्यमंत्री जी, केवल खोखले ऐलान मत करो, तुरंत सूखा घोषित करो, चारा डिपो और पशु शिविर खोलो, टैंकरों से पानी पहुंचाओ.