जयपुर: राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश नेतृत्व के बीच चल रहा विवाद अब अनुशासन की चौखट तक पहुंच गया है. विश्वेंद्र सिंह के तीखे आरोपों और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद कांग्रेस ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना की ओर से जारी नोटिस में आठ बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है. मौजूदा परिस्थितियां संकेत दे रही है कि अब कांग्रेस विश्वेंद्र सिंह पर निलंबन की कार्रवाई करेगी और दूसरी तरफ विश्वेंद्र सिंह ने भी कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं.
भरतपुर में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के अनुशासनात्मक एक्शन तक पहुंच चुका है. पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-डीग संगठन और प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए. उन्होंने टिकट वितरण से लेकर संगठन की कार्यप्रणाली तक पर गंभीर आरोप लगाए और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी निशाने पर लिया. इसके बाद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लगाए गए आरोपों ने राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को गरमा दिया.
अब कांग्रेस ने जवाब मांगकर साफ कर दिया है कि विवाद को संगठन के स्तर पर देखा जाएगा. यानी अब मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि पार्टी के अनुशासन और संगठनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गया है. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति के उदयलाल आंजना ने विश्वेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में आठ बिंदुओं के आधार पर जवाब मांगा गया है. पार्टी की ओर से विश्वेंद्र सिंह के संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी, पार्टी कार्यक्रमों में भूमिका और सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश नेतृत्व तथा जिलाध्यक्षों पर उठाए गए सवालों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है.
यानी अब विश्वेंद्र सिंह के सामने दो रास्ते हैं-नोटिस का जवाब देकर अपनी बात पार्टी फोरम पर रखना, या फिर विवाद को और आगे ले जाना और पार्टी से अलग होना. दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विवाद पर संयमित प्रतिक्रिया दी. डोटासरा ने कहा कि विश्वेंद्र सिंह वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय तक कांग्रेस की सेवा कर चुके हैं. उन्होंने अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे राज्यमंत्री थे, तब विश्वेंद्र सिंह कैबिनेट मंत्री होते हुए भी उनके कमरे में आकर बैठते थे और छोटे भाई जैसा स्नेह रखते थे. हालांकि डोटासरा ने यह भी कहा कि पिछले करीब ढाई साल से संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर विश्वेंद्र सिंह से उनका संवाद नहीं हो पाया. डोटासरा का कहना है कि अभी तक उनके पास विश्वेंद्र सिंह की ओर से कोई आधिकारिक पत्र नहीं आया था और सोशल मीडिया पर आई बातों के आधार पर टिप्पणी करना उचित नहीं है.
लेकिन अब कांग्रेस का कारण बताओ नोटिस सामने आ चुका है. यानी सोशल मीडिया के आरोपों से शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के औपचारिक अनुशासनात्मक मंच पर पहुंच गया है. इस पूरे विवाद में एक और बात अहम है. विश्वेंद्र सिंह ने संगठन के जिलाध्यक्षों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि जिलाध्यक्ष संगठन सृजन प्रक्रिया के जरिए बनाए गए हैं.
डोटासरा ने यह भी कहा कि विश्वेंद्र सिंह की आपत्तियां सामने आने पर उनका जवाब लिया जाएगा और उस पर विचार किया जाएगा. कुल मिलाकर राजस्थान कांग्रेस का ये विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर है. एक तरफ पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के गंभीर आरोप हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस का कारण बताओ नोटिस. फिलहाल निगाहें विश्वेंद्र सिंह के जवाब और उसके बाद कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हैं.