जयपुर: राजस्थान में क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को अधिक कारगर बनाने की दिशा में जयपुर डिस्कॉम ने बड़ी पहल की है.ऊर्जा क्षेत्र की वैश्विक संस्था ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (जी-ऐप) के साथ मिलकर डिस्कॉम प्रशासन देश की पहली डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर स्तर की सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की पायलट परियोजना विकसित करने जा रहा हैं. विद्युत वितरण निगमों की राष्ट्रीय कांफ्रेंस के अंतिम दिन दोनों संस्थाओं ने इसके लिए जयपुर के के.एल. सैनी स्टेडियम में 250 किलोवाट/250 किलोवाट-घंटा क्षमता की पायलट परियोजना को विकसित करने के लिए आरएफपी जारी किया.
विद्युत वितरण निगमों की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन विभिन्न सत्रों में ऊर्जा नवाचारों पर मंथन किया गया.इस दौरान कैलिफोर्निया से आए एक्सपर्टस ने डिमांड साइड मैनेजमेंट के लिए स्मार्ट मीटर की उपयोगिता, बड़े कैंपस, व्यावसायिक परिसरों और आवासीय कॉलोनियों के लिए डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम (DCS) की अनिवार्य, 100 किलोवाट से अधिक के नए विद्युत कनेक्शनों के लिए न्यूनतम 2 घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) अनिवार्य करना तथा वर्चुअल पावर प्लांट (VPP),एग्रीगेटर्स और पावर मार्केट तक पहुंच का विस्तार करने समेत कई बिंदुओं पर चर्चा की.कांफ्रेस में जयपुर डिस्कॉम सीएमडी आरती डोगरा की मौजूदगी में सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की पायलट परियोजना को लेकर आरएफपी भी जारी किया गया.
मानसरोवर की पीक डिमाण्ड के पावर मैनेजमेंट का होगा आंकलन:
-सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की पायलट परियोजना से जुड़ी खबर
-इस परियोजना के माध्यम से जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में विद्युत की अधिकतम स्थानीय मांग का प्रबंधन तथा
-रूफ टॉप सोलर से उत्पादित बिजली का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने को लेकर होगी स्टेडी
-इस कवायद के लिए सोडियम-आयन बैटरी तकनीक की क्षमता का किया जाएगा आकलन
-परियोजना के तहत वितरण ट्रांसफॉर्मर पर ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित कर किया जाएगा यह आंकलन
-उपभोक्ताओं के नजदीक बैटरी एनर्जी भंडारण सिस्टम स्थापित करने से निर्बाध आपूर्ति में कितनी सहायता मिलती है
-ट्रांसफॉर्मर पर अधिकतम विद्युत मांग के दौरान निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में कितनी सहायता मिल सकती है
-साथ ही लिथियम-आयन जैसी प्रचलित बैटरी तकनीकों के विकल्प के रूप में इसकी उपयोगिता भी परखी जाएगी
-इसके अनुसार जयपुर डिस्कॉम परियोजना के लिए स्थान, तकनीकी कार्मिक और संचालन संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराएगा
-जबकि जी-ऐप प्रणाली के डिजाइन,मॉनिटरिंग और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ अभियंताओं को देगा प्रशिक्षण
-दोनों संस्थाएं परियोजना के निष्कर्ष एवं परिणामों को साझा करेंगी, ताकि अन्य वितरण कम्पनियां भी इसका आंकलन कर सके
इस मौके पर ऊर्जा सचिव आरती डोगरा ने कहा कि यह पायलट परियोजना प्रदेश के वितरण नेटवर्क को कारगर बनाने, रूफ टॉप सोलर से उत्पन्न सौर ऊर्जा को भंडारित करने और यहां की जलवायु परिस्थितियों में यह परीक्षण करने का अवसर प्रदान करेगी कि लिथियम-आयन के विकल्प के रूप में ऊर्जा भंडारण तकनीक इस दबाव को कम करने में कितनी प्रभावी हो सकती है. परियोजना से प्राप्त अनुभव भविष्य में विद्युत वितरण नेटवर्क में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की स्थापना से संबंधित अधिक विश्वसनीय निर्णय लेने में सहायक होंगे.
ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट की कंट्री हेड सुश्री तान्या सिंघल ने कहा कि आने वाले समय में भारत के विद्युत ग्रिड में ऊर्जा भंडारण की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और विद्युत वितरण कंपनियों के पास चयन के लिए एक से अधिक विश्वसनीय बैटरी तकनीकों के विकल्प होने चाहिए. राजस्थान की परिस्थितियों में कार्यरत ट्रांसफॉर्मर पर सोडियम-आयन तकनीक का परीक्षण विद्युत वितरण कंपनियों को अनुमानों के बजाय वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में मदद करेगा.