40 विला खरीदने के मामले में सरकार का एक्शन, एसीएस शिखर अग्रवाल APO, कार्मिक विभाग ने जारी किया आदेश

जयपुर: अनंता समूह के साथ साझेदारी में 40 विला खरीदने को लेकर लगातार मीडिया में खबरों के बाद आखिरकार भजनलाल सरकार ने सख्त रुख दिखाते हुए 1993 बैच के आईएएस शिखर अग्रवाल को मध्यरात्रि में एपीओ कर दिया. इस प्रकरण से शासन-प्रशासन की बड़ी छवि धूमिल होने के रूप में देखा जा रहा था और ऐसे में भजनलाल सरकार ने भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हुए सख्ती से फैसला लेते हुए शिखर को एपीओ कर दिया. वे अभी उद्योग विभाग में एसीएस थे. उनके पास उद्योग,एमएसएमई,राजकीय उपक्रम,डीएमआईसी,बीडा ओएसडी का अहम जिम्मा था.

इसके साथ ही वे रीको में अध्यक्ष और सीएमडी राजसीको की भी बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे थे. वे इस सरकार में सीएमओ में एसीएस रह चुके हैं. साथ ही इससे पूर्व एसीएस वन,रेट चेयरमैन,जल संसाधन में प्रमुख सचिव, जेडीसी, केन्द्र में दिल्ली में प्रधानमंत्री के सलाहकार के निजी सचिव, केन्द्र में ही श्रम मंत्रालय में डीजी और केन्द्रीय राजस्व विभाग में निदेशक, बीकानेर,उदयपुर,हनुमानगढ़, जालोर जैसे जिलों में कलेक्टर, वित्त कर विभाग में डीएस जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. हाल ही में अनंता समूह के साथ विला खरीदने और उसी को लीज पर देने के साथ समूह को कई तरह की रियायतें मिलने के प्रकरण में उन पर मीडिया और सोशल मीडिया में अनुचित लाभ के आरोप लगे थे.

इसके बाद बुधवार मध्यरात्रि को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त एक्शन लेते हुए शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया है. उन्हें सरकारों में एक से एक पावरफुल ओहदे मिलने के साथ बेहतर सर्विस डिलीवरी, वर्क एंड टास्क ओरिएंटेड आईएएस अधिकारियों में से एक माना जाता रहा है. इसके साथ ही वरिष्ठता में अभी सातवें स्थान पर होने से उन्हें वी. श्रीनिवास के कार्यकाल पूरे होने के बाद सीएस के दावेदारों के संभावित चेहरों में से एक माना जा रहा था. इस सख्त एक्शन के बाद जहां ये संभावनाएं कम हुईं हैं और भविष्य में इनकी अपेक्षाकृत बेहतर पोस्टिंग न मिलने का आकलन किया जा रहा है. तो वहीं इसके अन्य असर के रूप में अनंता समूह को दी गई रियायतें वापस लेने और कस्टमाइज पैकेज का लाभ नहीं देने संबंधी निर्णय भी संभव है.