जयपुर: राजस्थान पुलिस के पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टर) की अन्य विभागों में होने वाली प्रतिनियुक्ति को लेकर पुलिस मुख्यालय ने पहली बार स्पष्ट पात्रता आधारित नीति लागू कर दी है. लंबे समय से जेडीए, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, आबकारी और अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति के लिए रिकॉर्ड संख्या में आने वाली सिफारिशों और आवेदनों के बीच अब केवल निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले पुलिस निरीक्षकों को ही मौका मिलेगा.
विकास प्राधिकरण, यूआईटी, नगर निगम, आबकारी विभाग, आरएसएमएमएल, पीसीपीएनडीटी, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) और रेरा जैसे विभागों में प्रतिनियुक्ति के लिए अब डिजायर और सिफारिशें काम नहीं आयेंगी, नई व्यवस्था के तहत अब डेपुटेशन पूरी तरह पात्रता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर होगा. पुलिस मुख्यालय का उद्देश्य प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता आधारित बनाना है, ताकि केवल उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड वाले अधिकारियों को ही इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जा सके.
आदेश के अनुसार आवेदन करने वाले पुलिस निरीक्षक के लिए सीधी भर्ती के बाद कम से कम पांच वर्ष की नियमित सेवा पूरी होना अनिवार्य होगा. इसके अलावा संबंधित अधिकारी ने अपने वर्तमान पद अथवा समकक्ष रैंक पर दो वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा किया होना चाहिए. पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान किसी अन्य विभाग में प्रतिनियुक्ति पर रहे अधिकारी इस प्रक्रिया के लिए पात्र नहीं होंगे. इसी प्रकार पिछले दो वर्षों में किसी भी प्रकार का विभागीय दंड पाने वाले अधिकारियों को भी आवेदन का अवसर नहीं मिलेगा.इतना ही नहीं, जिन अधिकारियों के विरुद्ध वर्तमान में विभागीय जांच, एसीबी का मामला या कोई आपराधिक प्रकरण लंबित है, उन्हें भी प्रतिनियुक्ति के लिए अयोग्य माना जाएगा. सेवा अवधि के दौरान गंभीर आरोपों में दोषी पाए गए अथवा बड़ी सजा प्राप्त करने वाले अधिकारियों को भी इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है.
पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस इकाइयों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ पात्र और इच्छुक पुलिस निरीक्षकों के आवेदन निर्धारित शर्तों की जांच के बाद अग्रेषित करें. आवेदन 22 जुलाई 2026 तक अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कार्मिक) कार्यालय में भेजने होंगे. तय समय सीमा के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन पत्रों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा. पुलिस महकमे में इस नई नीति को डेपुटेशन व्यवस्था में बड़ा सुधार माना जा रहा है. अब तक इन विभागों में प्रतिनियुक्ति को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा रहती थी और बड़ी संख्या में सिफारिशें भी आती थीं. नई पात्रता आधारित व्यवस्था लागू होने से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने के साथ-साथ योग्य, निष्कलंक सेवा रिकॉर्ड और निर्धारित अनुभव रखने वाले पुलिस निरीक्षकों को ही इन महत्वपूर्ण विभागों में कार्य करने का अवसर मिल सकेगा. इससे प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया में समान अवसर सुनिश्चित होने और मनमानी की संभावनाओं पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है.