VIDEO: PMFBY में बड़े सुधार की तैयारी, केंद्र को भेजे किसान हितैषी सुझाव, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों को और अधिक मजबूत करने के लिए  कृषि आयुक्तालय ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को सुझाव भेजे हैं. यह सुझाव राज्य के किसान संघों, किसान प्रतिनिधियों, विभाग के कार्मिकों और अन्य स्रोतों से प्राप्त हुए. किस तरह से सुझाव हैं और किसान को कैसे लाभ मिल सकेगा.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि प्रदेश किसानों के किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का पूर्ण रूप से लाभ मिलना चाहिए. अंतिम पंक्ति में बैठे किसान को भी शामिल किया जाए. ऐसे में कृषि मंत्री डा. किरोड़ीलाल मीणा की पहल पर कृषि आयुक्तलय ने जमीनी स्तर से सुझाव आमंत्रित किए और इसे केंद्र को भेजा है. कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने भेजे प्रस्ताव में स्पष्ट किया कि योजना वर्तमान में एंड-टू-एंड ऑनलाइन मोड में पारदर्शी तरीके से क्रियान्वित की जा रही और सुधारात्मक उपायों पर निरंतर कार्य भी किया जा रहा है. लेकिन किसानों से जमीनी स्तर पर मिले सुझावों को शामिल किया जा सकता है.

किसानों के हित को देखते हुए केंद्र को भेजे सुझाव
-ऋणी किसानों के लिए योजना को वास्तविक रूप से स्वैच्छिक बनाना
-सभी किसानों के लिए एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य करना
-आधार एवं एग्रीस्टैक से ऑटो-फेच व्यवस्था कामय करना
-DCS (ई-गिरदावरी) अथवा क्रॉप बुकिंग ऐप से बोई गई फसल का सत्यापन   
-तकनीक आधारित व्यक्तिगत फील्ड स्तर पर हानि का आंकलन
-एड-ऑन कवर के लिए तकनीक आधारित मापदंड तय हों 
-बीमा कंपनी द्वारा विलंबित क्लेम भुगतान पर स्वतः ब्याज की गणना की जाए
-रिजेक्टेड पॉलिसी में प्रीमियम वापसी पर ब्याज के लिए बीमा कंपनी को करें पाबंद
-राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति में किसान का भी हो प्रतिनिधित्व
-बीमित किसान की मृत्यु पर क्लेम भुगतान प्रक्रिया सरल बनाया जाए
-एनईएफटी बाउंस या खाता सत्यापन विफल होने पर किसान को मिले ब्याज का लाभ

कृषि आयुक्तालय ने लिखा कि PMFBY  ऋणी एवं गैर-ऋणी दोनों श्रेणी के किसानों के लिए स्वैच्छिक है. व्यावहारिक रूप से गैर-ऋणी किसान अपनी इच्छा से ही आवेदन करते हैं, जबकि ऋणी किसानों को योजना से बाहर रहने के लिए निर्धारित अवधि में ऑप्ट-आउट फॉर्म प्रस्तुत करना आवश्यक होता है. फॉर्म न जमा करने पर उनका प्रीमियम स्वतः कट जाता है. राज्य के दूरदराज क्षेत्रों के किसान अक्सर ऑप्ट-आउट आवेदन करने से चूक जाते हैं. किसानों की मांग है कि ऋणी किसानों को भी केवल उनकी स्वैच्छिक सहमति एवं आवेदन के आधार पर ही योजना में शामिल किया जाए, ताकि योजना की स्वैच्छिक प्रकृति स्पष्ट हो और भ्रम तथा शिकायतों में कमी आए.

किसानों की मांग है कि बीमा करवाने वाले किसान से संबंधित सभी सूचनाएं आधार एवं एग्रीस्टैक आईडी से ऑटो-फेच की जाएं. राज्य में किसानों के बैंक खाते जनाधार से जुड़े हुए हैं. अतः आधार/जनाधार से एनसीआईपी पर बैंक विवरण फेच करने का प्रावधान किया जाए.

किसान द्वारा बोई गई फसल का सत्यापन पॉलिसी अनुमोदन के लिए डीसीएस (ई-गिरदावरी) अथवा क्रॉप बुकिंग ऐप विकसित कर उसके माध्यम से किया जाए. क्रॉप बुकिंग ऐप के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहन (इन्सेन्टिव) दिए जाने पर भी विचार किया जाए. फसल कटाई प्रयोगों में अनियमितताओं को रोकना कठिन है. अतः प्रत्येक किसान के फील्ड के आधार पर तकनीक के माध्यम से हानि का आंकलन कर बीमा क्लेम का प्रावधान लागू किया जाए, ताकि किसानों को वास्तविक हानि के अनुरूप क्लेम मिल सके. योजना के सभी एड-ऑन कवर के बीमा क्लेम निर्धारण के लिए तकनीक आधारित मापदंड निर्धारित किए जाएं, ताकि कार्मिकों, बीमा कंपनी या किसानों के दबाव में मनमाने तरीके से हानि आकलन पर रोक लगे.

सुझाव दिया गया कि  बीमा कंपनी द्वारा नियत समय में क्लेम भुगतान न किए जाने पर प्रावधानों के अनुसार स्वतः ब्याज की गणना कर भुगतान किया जाए. प्रीमियम प्राप्त होने के बाद भी क्लेम भुगतान में विलंब को जानबूझकर किया गया विलंब मानकर ब्याज की पेनल्टी स्वतः लगाई जाए. पॉलिसी रिजेक्ट होने के बाद भी बीमा कंपनियां प्रीमियम लौटाने में विलंब करती हैं. ऐसे प्रकरणों में ब्याज सहित राशि लौटाने के लिए कंपनियों को पाबंद किया जाए. परिचालन मार्गदर्शिका 2023 में राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति में किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं है. आवश्यक संशोधन कर जिला स्तरीय समिति के समान राज्य स्तर पर भी किसानों को भागीदारी दी जाए.

बतादें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को तर्कसंगत और प्रभावी बनाने के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजे गए सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. साथ ही किसानों को उनको लाभ मिलने में आसानी और बीमा कंपनियों पर लगाम कसी जा सकती है.