जयपुरः सरकारी चिकित्सा सेवाओं में लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे 686 डॉक्टरों पर अब सेवा समाप्ति की तलवार लटक गई है. चिकित्सा विभाग ने ड्यूटी से लगातार दूरी बनाए रखने वाले इन चिकित्सकों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है. विभाग ने साफ कर दिया है कि तय समय में जवाब नहीं देने और उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रखने वालों के खिलाफ नौकरी समाप्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी.
दरअसल, पिछले काफी समय से 686 डॉक्टर्स स्थानांतरण/APO/PG पूर्ण करने के बाद से अनुपस्थित चल रहे है. कई बार नोटिस जारी होने के बावजूद इन चिकित्सको ने अभी तक अपनी जॉइनिंग नहीं दी है, जिसको देखते हुए अब चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. ऐसे में अब निदेशक (जनस्वास्थ्य) डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने अंतिम नोटिस जारी कर संबंधित चिकित्सकों को 27 अक्टूबर तक निदेशालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आपत्ति या प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. इसमें स्थानांतरण, एपीओ (पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा) और पीजी पूरी करने के बाद से अनुपस्थित चल रहे डॉक्टर शामिल हैं. विभाग ने इस नोटिस को अंतिम अवसर के रूप में जारी किया है.
बॉन्ड तोड़ने पर वसूली, रजिस्ट्रेशन भी होगा निरस्त
बात सेवारत कोटे से पीजी के बाद नौकरी ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टर्स की
चिकित्सा विभाग ने लम्बे समय से गैरहाजिर डॉक्टरों को जारी किया अंतिम नोटिस
PG पूर्ण करने के बाद से अनुपस्थित चल रहे डॉक्टर्स को नोटिस में हिदायत
27 अक्टूबर तक निदेशालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर प्रतिवेदन देने के निर्देश
अन्यथा पीजी के दौरान दिए गए बॉन्ड की शर्तों के मुताबिक शुरू होगी पीडीआर एक्ट में वसूली
साथ ही राजस्थान मेडिकल कौंसिल से जारी रजिस्ट्रेशन को भी किया जाएगा निरस्त
चिकित्सकों की लंबी गैरहाजिरी का सीधा असर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध मानव संसाधन पर पड़ता है. पहले से कार्यरत डॉक्टर के ड्यूटी पर नहीं आने से स्वीकृत पद और वास्तविक उपलब्ध चिकित्सकों के बीच अंतर बढ़ता है. ऐसे में विभाग की इस कार्रवाई को चिकित्सा सेवाओं में जवाबदेही तय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, संबंधित चिकित्सकों के प्रतिवेदन और विभागीय जांच के बाद ही प्रत्येक मामले में आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी.