जयपुरः राजस्थान में स्लीपर बसों की बॉडी निर्माण और वाहनों में किए जाने वाले बदलावों को लेकर परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. विभाग ने सभी RTO और DTO को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि स्लीपर बसों में निर्धारित सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य रूप से कराया जाए. AIS-119 और AIS-52 मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
विभाग के निर्देशों के मुताबिक बस बॉडी का निर्माण 23 मार्च 2017 और 1 अप्रैल 2015 से लागू निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी है. जांच के दौरान यदि किसी स्लीपर बस की बॉडी निर्धारित AIS मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो केवल वाहन मालिक को जिम्मेदार मानकर कार्रवाई नहीं की जाएगी, बल्कि बस बॉडी निर्माता की भूमिका भी तय की जाएगी.परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों से बस बॉडी निर्माता की पूरी जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए वाहन मालिक से निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंडरटेकिंग ली जाएगी, जिसमें बस की बॉडी तैयार करने वाले निर्माता की पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी.यदि बस की बॉडी निर्माण में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है और मामले में धारा 182A(1) के तहत अपराध दर्ज होता है, तो उसके निस्तारण के बाद संबंधित बस बॉडी निर्माता के खिलाफ भी समुचित कार्रवाई की जाएगी. यानी अब नियमों के विपरीत बस बॉडी तैयार करने वाले निर्माताओं की जिम्मेदारी भी तय होगी.परिवहन विभाग ने बसों में बाद में किए जाने वाले बदलावों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है. बस निर्माण के बाद वाहन में किसी भी तरह का परिवर्तन या मॉडिफिकेशन किए जाने की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी वाहन मालिक की होगी.यदि जांच के दौरान यह सामने आता है कि वाहन में निर्धारित मानकों के विपरीत बाद में कोई बदलाव किया गया है तो वाहन मालिक के खिलाफ धारा 182A(4) के तहत कार्रवाई की जाएगी. इससे स्लीपर बस संचालकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है.
हालांकि विभाग के इस आदेश में कार्रवाई के साथ निजी बस संचालकों के प्रति कुछ नरमी के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं. परिवहन विभाग ने RTO को निर्देश दिए हैं कि नियमों के उल्लंघन के मामलों में बड़े-बड़े एक या दो लाख रुपये के चालान बनाने से बचा जाए. यानी कार्रवाई का उद्देश्य केवल भारी जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना रहेगा.इससे निजी बस संचालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. परिवहन विभाग अब बसों में तकनीकी और संरचनात्मक खामियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि कार्रवाई नियमों के अनुरूप और जिम्मेदारी के स्पष्ट निर्धारण के आधार पर हो.नए निर्देशों से स्लीपर बसों के मामले में जिम्मेदारी दो स्तर पर तय होती दिखाई दे रही है. बस बॉडी निर्माण के समय मानकों का उल्लंघन करने पर निर्माता जिम्मेदार होगा, जबकि बाद में वाहन में किए गए अनधिकृत बदलाव के लिए वाहन मालिक जिम्मेदार होगा.अब RTO और DTO स्तर पर होने वाली जांच में बस की बॉडी, उसके निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड और बाद में किए गए बदलावों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी. विभाग ने सभी अधिकारियों को निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने को कहा है. माना जा रहा है कि इससे स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ बस बॉडी निर्माताओं की जवाबदेही भी तय होगी और निजी बस संचालकों पर अनावश्यक रूप से भारी चालान लगाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा.