महाराज विश्वेंद्र सिंह का बयान, कहा- कल आए लोग मुझे नहीं चला सकते... वो क्या मेरे खिलाफ रिपोर्ट देंगे ?

महाराज विश्वेंद्र सिंह का बयान, कहा- कल आए लोग मुझे नहीं चला सकते... वो क्या मेरे खिलाफ रिपोर्ट देंगे ?

जयपुर : भरतपुर के पूर्व महाराज विश्वेंद्र सिंह का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस आलाकमान को लिखे पत्र के जरिए अपने इस्तीफे के संकेत की बात कही थी. मेरी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से बात हुई. गहलोत जी मुंबई में हैं. मेरा साफ कहना कल आए लोग मुझे नहीं चला सकते. वो क्या मेरे खिलाफ रिपोर्ट देंगे ? सबको पता है.

भरतपुर में किसने कांग्रेस को लोकसभा का चुनाव जिताया ? संजना जाटव कैसे जीती थी ? सचिन पायलट के अलावा कोई नेता प्रचार में नहीं आया था. विधानसभा चुनाव में मिली हार के कुछ माह बाद ही कांग्रेस को विजय मिली थी. मैंने पत्र के जरिए अपनी बात कह दी है. मैंने अपने त्यागपत्र के संकेत दिए है.

बता दें कि पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि मैंने जीवन मे हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज़ सुन कर ही फैसला लिया है आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं उस से मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है. मेरा भी अन्तर मन दुखी और व्यथित है जिस पार्टी के लिए मैंने मेरा जीवन न्यौछावर कर दिया आज उसी पार्टी ने यदि मेरी निष्ठा, ईमानदारी, कर्तव्य परायणता का यह सिला दिया तो मैं अंदर से बहुत हिल गया हूं, मैंने हमेशा मान, सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है मेरे उसूल और आदर्शों से कभी कोई समझौता नहीं किया.

मेरे कार्यकर्ताओं में मौजूदा चापलूसी की परंपरा के कारण आक्रोश है, यदि सच को सच कहना, गलत और झूंठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा, मैं ना गलत करता हूं न ही गलत सहन करता हूं,मेरा सार्वजनिक जीवन जनता जनार्दन की देन है, मैं इनके लिए ही जीता हूं और इनके लिए ही मरूंगा, मेरे खून का हर कतरा मेरे कार्यकर्ताओं, मेरे मतदाताओं, मेरे क्षेत्र वासियों, प्रदेश वासियों के लिए बहा है.और बहेगा.

मेरा सार्वजनिक जीवन खुली किताब है, बेदाग है,मैंने मेरे दामन पर कभी दाग न तो लगने दिया और ना ही लगने दूंगा, ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है, मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से कभी समझौता नहीं किया उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं,मैं शायद अब आपकी गलत रीति नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाउंगा!