VIDEO: सचिवालय में लगे पंखे, अटका भुगतान! विभागीय कार्यप्रणाली और भुगतान प्रक्रिया पर खड़े हुए सवाल, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: सचिवालय के कर्मी दो साल से मुफ़्त की हवा खा रहे हैं. जी हां, सुनने में यह बड़ा अजीब है लेकिन यहां के बरामदों में दो साल पहले लगाए गए वॉल माउंटेड फैन की राशि का भुगतान तो नहीं ही हुआ, फर्म के खिलाफ कार्रवाई भी की गई. सचिवालय में सहायक कर्मियों की ओर से बार बार मांग के बाद कार्मिक सचिव ने यहां के बरामदों के लिए मैटल बॉडी के वॉल माउंटेड फैन लगाने को मंजूरी दी थी जिसके तहत पीडब्ल्यूडी ने निविदा लेकर काम तो पूरा करवा दिया लेकिन दो साल से इन पंखों का भुगतान ही नहीं हुआ. 

22.02.2024 को कार्मिक विभाग ने निविदा जारी की थी जिसके तहत सचिवालय में बरामदों में वॉल माउंटेड फैन लगाने थे. निविदा के तहत सेवा की शुरुआत 13 मार्च 2024 को करने और 12 जून 2024 को पंखे लगाने का काम पूरा करने को कहा गया था और  यह काम पूरा कर दिया गया. निविदा में सबसे कम दर के आधार पर फर्म को 30 लाख 43 हजार 485 रुपए का भुगतान करना था. इसके लिए संवेदक मैसर्स राधा गोविंद इलेक्ट्रिकल ने 599 वॉल माउंटेड फैन लगाए जिसकी पुष्टि खुद अधिशासी अभियंता ने SE को भेजे अपने 1 अक्टूबर 2024 को  पत्र में की. 

इस निविदा की कार्यपालना में सचिवालय में बरामदों में लगे पीवीसी बॉडी वाले वॉल माउंटेड फैन को हटाकर मैटल की बॉडी वाले हैवी ड्यूटी सर्क्युलेटर्स वॉल माउंटेड फैन लगा दिए गए. इसके बाद पीडब्ल्यूडी के ही पत्राचार में निविदा की कार्यपालना करवाते हुए सारे पंखे जल्दी लगाने का उल्लेख किया गया है जिससे इसके पूर्व में देरी और बाद में जल्दी से पंखे लगवाने की पुष्टि हुई है. इन पंखों को चालू करवाकर दिखवा दिया गया और ये पंखे बरामदों में रोजाना चलाये जा रहे हैं लेकिन इनकी राशि का अभी तक भुगतान नहीं हुआ.

क्या रहे कारण ?:
22 फरवरी 2024 को निविदा जारी होने के बाद 8 महीने में 599 पंखे लगाने की पुष्टि पीडब्ल्यूडी के पत्राचार में हुई है लेकिन उस समय इन पंखों का परीक्षण नहीं कराया गया. 
इसका एक कारण तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंजीनियर  का चिकित्सकीय अवकाश पर जाना और सचिवालय में लू और गर्मी में जल्दी से जल्दी पंखों का लगना भी रहा. पीडब्ल्यूडी के ही 3 जून 2024 के पत्राचार के अनुसार यह इसलिए भी जरूरी माना गया कि तब सचिवालय में GAD के एक सेक्शन में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी जिसकी जांच में PVC बॉडी वाले पंखों का गर्मी में जल्द गर्म होना माना गया था. इस पत्र में 4 महीने होने पर भी मैटल बॉडी वाले पंखों न लगने को लेकर नाराजगी जताई गई थी.

परीक्षण में देरी पर सवाल:
वहीं दो साल बाद तक भुगतान नहीं होने से परेशान संवेदक को टाला जाता रहा और करीब दो साल बाद परीक्षण के लिए 6 पंखे भेजे गए. 13 जून 2024 की पत्रावली अनुसार पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन SE ने 9 अप्रैल 2024 तक पंखों के इंस्पेक्शन नहीं होने को लेकर सवाल उठाए. साथ ही यह सवाल भी पूछा गया कि किस ब्रांड के पंखे लगने हैं इसके लिए संवेदक ने 24 अप्रैल से 6 मई 2024 के 13 दिनों तक का समय क्यों लगा दिया. जून 2024 में पंखे सचिवालय के बरामदों में लगा दिए गए लेकिन 1 साल से ज्यादा समय बाद 13 अगस्त 2025 को इन पंखों में से 6 पंखे परीक्षण यानि टेस्टिंग के लिए भेजा गया. 

श्री राम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च में 11 सितंबर से 12 सितंबर 2025 तक हुए परीक्षण यानि टेस्टिंग में सारे पंखों में हवा की गति और गुणवत्ता पाई गई लेकिन 3 पंखों में यह पाया गया कि पंखा 2 वॉट की बिजली ज्यादा खपत करना पाया गया. इसके बाद 10 मार्च 2026 को 13 मार्च 2024 का मैसर्स राधा गोविंद इलेक्ट्रिकल का वर्क ऑर्डर निरस्त कर दिया गया.अब पीडब्ल्यूडी के सेवा लेने के 1 साल 3 माह बाद परीक्षण कराने पर सवाल उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस समय इंस्टॉलेशन हुआ उसी समय परीक्षण के प्रावधान पर नियमानुसार अमल होता आया है. 

PWD के सेवा कामों के लिए यह नियम है कि एक बार कार्यादेश मंजूर होने और कार्य या सेवा पूरा होने के बाद उसमें कोई दोष बाद में पाया जाता है तो संबंधित क्षति की राशि कटौती करके शेष भुगतान किया जाता है, लेकिन मैसर्स राधा गोविंद इलेक्ट्रिकल के साथ ऐसा नहीं किया गया. संवेदक की शिकायत यह भी है कि इंस्टॉलेशन के समय यदि तकनीकी दिक्कत है तो इसके लिए जिम्मेदारी होती है और 3 पंखे में 1 साल चलने पर वॉट और अन्य बिंदुओं में फर्क आ सकता है जिसके लिए संवेदक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते क्योंकि विभाग खुद ही परीक्षण में देरी कर चुका था.दूसरी ओर संवेदक ने इन पंखों की मरम्मत के लिए 5 साल की गारंटी भी ली है. वहीं सचिवालय में बरामदों में लगे पंखे लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन अब फर्म का टेंडर निरस्त करने के साथ पीडब्ल्यूडी के संबंधित डिवीजन में किसी भी निविदा में भाग लेने के लिए दो साल के लिए डिबार कर दिया गया है.