VIDEO: लोकतंत्र की पहली पाठशाला पर ताला! फिर गरमाई छात्र राजनीति, चुनाव बहाली को लेकर आंदोलन तेज, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर छात्रनेताओं ने धरने प्रदर्शनों को दौर शुरू कर दिया है. पिछले करीब चार वर्षों से राजस्थान के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं. ऐसे में छात्र नेता लगातार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं.  राजस्थान यूनिवर्सिटी परिसर में भी कई छात्र नेता छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए. उनका कहना है कि छात्रसंघ चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पहली पाठशाला है. आखिर क्यों बंद हुए चुनाव, क्या है छात्रों की मांग और कब हुए थे आखिरी चुनाव... देखिए यह खास रिपोर्ट

कांग्रेस की सरकार में छात्रसंघ चुनाव पर लगाई गई थी रोक: 
-छात्रसंघ चुनावों पर 12 अगस्त 2023 को लगाई गई थी रोक
-आखिरी बार प्रदेश में वर्ष 2022 में  हुए छात्रसंघ चुनाव
-राजस्थान यूनिवर्सिटी में वर्ष 2022 में निर्दलीय अध्यक्ष बने निर्मल चौधरी
-इसके बाद छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगने से नहीं मिला यूनिवर्सिटी को कोई अध्यक्ष
-हर साल छात्रनेताओं की ओर से किया जा रहा विरोध प्रदर्शन
-धरना-प्रदर्शन के लेकर छात्रनेता करते आ रहे भूख हडताल

छात्रसंघ चुनाव को सक्रिय राजनीति की पहली सीढी माना जाता है, लेकिन वर्ष 2023 में कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगा दी थी जो कि आज तक चलती आ रही है. इसको लेकर छात्रनेताओं में खासी नाराजगी है. छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर समय समय पर आंदोलन होते रहे, लेकिन उसके बाद भी छात्रसंघ चुनाव पर लगी रोक आज भी कायम है. लिहाजा कई छात्रनेता जो छात्रसंघ चुनाव की तैयारी कर रहे थे वो उम्र की सीमा से बाहर हो गई और उनका राजनिति में आने का सपना केवल सपना ही रह गया एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग ने जोर पकडा है. धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में छात्रों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं. लेकिन उनका प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं है. ऐसे में छात्र हितों की आवाज प्रशासन तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पा रही. 

दरअसल छात्रसंघ चुनाव राजस्थान की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं. राज्य के कई बड़े राजनीतिक नेताओं ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से ही की है. छात्रसंघ चुनावों को लोकतंत्र की प्रयोगशाला माना जाता है, जहां युवा नेतृत्व तैयार होता है. राजस्थान यूनिवर्सिटी की बात करें तो यहां छात्र राजनीति का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है. इसी विश्वविद्यालय ने प्रदेश और देश को कई बड़े नेता दिए हैं. यही वजह है कि जब भी चुनाव बंद होते हैं, उसका विरोध सबसे ज्यादा राजस्थान यूनिवर्सिटी में देखने को मिलता है.

कांग्रेस सरकार ने छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगाते हुए ये कहा: 
-लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन होना और हिंसा का माहौल बनना
-मौजूदा सरकार ने रास्ट्रीय शिक्षा नीति,शिक्षा का माहौल खराब होना बताया
-कई यूनिवर्सिटी के कुलपति ने छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने की कही थी बात

वर्ष 2024 में सरकार की ओर से जारी शैक्षणिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव का उल्लेख होने के बाद छात्रों में उम्मीद जगी थी कि चुनाव बहाल हो जाएंगे. लेकिन बाद में चुनाव आयोजित नहीं हो सके और मामला फिर अधर में लटक गया. उधर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क अलग है. सरकार ने अदालत में दिए अपने जवाब में कहा था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के क्रियान्वयन, शैक्षणिक सत्र और परीक्षा कार्यक्रमों पर प्रभाव पड़ने की आशंका के कारण फिलहाल चुनाव करवाना व्यावहारिक नहीं है. कई कुलपतियों ने भी चुनाव से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही थी, लेकिन छात्र नेता इन दलीलों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

उनका कहना है कि यदि शिक्षक संगठनों और कर्मचारी संघों के चुनाव हो सकते हैं, तो छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित क्यों रखा जा रहा है. छात्र नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए छात्रसंघ चुनाव बेहद जरूरी हैं. उनके अनुसार जब युवा नेतृत्व को मंच नहीं मिलेगा तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होगी. तो कुल मिलाकर छात्रसंघ चुनाव बहाली का मुद्दा एक बार फिर राजस्थान की छात्र राजनीति के केंद्र में आ गया है. प्रदेश में आखिरी छात्रसंघ चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे अब देखना होगा कि छात्रों के बढ़ते दबाव, धरने-प्रदर्शनों के बीच सरकार चुनाव बहाली को लेकर क्या फैसला करती है.