जयपुरः राजस्थान हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर बड़ा फैसला दिया है. दो बालिग अपनी मर्जी से साथ रह सकते हैं, समाज या परिवार रोक नहीं सकता है. अनुच्छेद 21 के तहत हर बालिग को अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार है. जान का खतरा होने पर पुलिस सुरक्षा देना राज्य की जिम्मेदारी है. भरतपुर के 19 वर्षीय युवक-युवती की याचिका पर अहम आदेश आया है. परिवार से धमकियां मिलने पर हाईकोर्ट ने सुरक्षा पर विचार के निर्देश दिए.
पुलिस पहले खतरे का आकलन करे,फिर जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपलब्ध कराएं. सामाजिक या नैतिक असहमति से संवैधानिक अधिकार खत्म नहीं होते. सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हवाला देकर हाईकोर्ट ने आदेश दिया. राजस्थान पुलिस अधिनियम के तहत नागरिकों की सुरक्षा पुलिस का कर्तव्य है. जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने थाना प्रभारी को आवेदन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. यह आदेश केवल सुरक्षा तक सीमित,अन्य दीवानी या आपराधिक मामलों पर असर नहीं है.