जयपुर: ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की विशेष भूमिका होती है. ग्रहों की चाल और उनके गुण व्यक्ति के स्वभाव व भविष्य पर खासा असर डालते हैं. ग्रह एक निश्चित अंतराल पर अपनी चाल को बदलते रहते हैं. यह एक विशेष अवधि में मौजूदा राशि को छोड़कर दूसरी राशि में जाते रहते हैं. जब-जब ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है तब तब इसका व्यापक असर सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है. हर महीने कई ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्टूबर माह में सूर्य और गुरु राशि परिवर्तन करेंगे. जबकि शुक्र और बुध वक्री भी होंगे और उदय अस्त भी होंगे. सूर्य 17 अक्टूबर को शाम 7:50 पर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. देवगुरु बृहस्पति 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. शुक्र 3 अक्टूबर को दोपहर 12:44 पर वक्री होंगे. शुक्र 14 अक्टूबर को रात्रि 12:18 पर पूरब दिशा में अस्त होंगे और 28 अक्टूबर को सुबह 7:36 पर पश्चिम दिशा में उदय होंगे. बुध 24 अक्टूबर को दोपहर 12:30 पर वक्री होंगे. 28 अक्टूबर को बुध सुबह 6:32 पर पश्चिम दिशा में अस्त होंगे. शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में बने रहेंगे, जबकि राहु कुंभ में और केतु सिंह में विराजमान रहेंगे. इन ग्रह परिवर्तनों का असर हर किसी की जिंदगी पर अलग-अलग ढंग से दिखाई देगा. इसमें किसी को लाभ तो किसी को हानि होगी.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल का असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है. ज्योतिष के नजरिए से भी ये माह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है. इस माह में 2 ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे. वैदिक ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार मनुष्य के जीवन में जो भी घटनाएं घटित होती हैं. उनका कारण ग्रहीय दशा, गोचर, उनकी चाल है. सौरमंडल में बैठे ग्रह ही यह निर्धारित करते हैं कि आने वाला समय कैसा होगा और मनुष्य जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा.
17 अक्टूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है. कुंडली में सूर्य ग्रह के मजबूत होने पर व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान और यश में बढ़ोतरी होती है. सूर्य ग्रह का असर शरीर में पेट, आंखें, दिल, चेहरे और हड्डियों पर होता है. सूर्य के अशुभ प्रभाव से सिरदर्द, बुखार और दिल की बीमारियां होती हैं. इसके शुभ प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है. सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है. इस ग्रह के प्रभाव से जॉब और बिजनेस में तरक्की भी मिलती है. दिनांक 17 अक्टूबर को ग्रहों के राजा सूर्य तुला राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. यह राशि परिवर्तन शाम 7:50 पर होगा. तुला राशि सूर्य की नीच राशि में आती है. यह गोचर जातक के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा. तुला राशि वाले इस अवधि में सतर्क रहें. उन पर गलत आरोप लग सकता हैं. अच्छाई के बदले अपयश मिल सकता है. स्वास्थ्य को लेकर भी यह समय अच्छा नहीं है.
31 अक्टूबर को गुरु करेंगे सिंह राशि में गोचर
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर के अंतिम दिन यानी 31 अक्तूबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. गुरु का यह राशि परिवर्तन महीने के प्रमुख ग्रह गोचरों में शामिल रहेगा. बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, संतान, धन, धर्म और विस्तार का कारक ग्रह माना जाता है. सिंह राशि में गुरु का प्रवेश कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकता है. इस गोचर का प्रभाव केवल व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों पर भी ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाता है.
बुध का वक्री होना
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 24 अक्तूबर को बुध वक्री हो जाएंगे. बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और संचार का कारक ग्रह माना जाता है. ऐसे में बुध की वक्री चाल के दौरान बातचीत, कागजी कार्यों, व्यापारिक समझौतों और महत्वपूर्ण निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. महीने के अंतिम दिनों में बुध और मंगल का संबंध भी बनेगा, जिससे ग्रहों की स्थिति और अधिक प्रभावशाली हो सकती है.
शुक्र की वक्री गति
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्टूबर की शुरुआत में शुक्र अपनी स्वराशि तुला में विराजमान रहेंगे. 3 अक्टूबर को शुक्र इसी राशि में वक्री गति शुरू करेंगे. शुक्र का अपनी ही राशि में होना ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. वक्री अवस्था में शुक्र के प्रभाव से प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं, कला और आर्थिक मामलों से जुड़े फैसलों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं. इसके बाद 24 अक्टूबर को शुक्र चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे ग्रहों की स्थिति में एक और बदलाव आएगा.
अक्टूबर में बनेंगे ये खास योग
त्रिग्रही योग
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्टूबर की शुरुआत में कर्क राशि में चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति की युति से त्रिग्रही योग का निर्माण होगा. 4 से 6 अक्तूबर के बीच बनने वाला यह योग चंद्रमा की तेज गति के कारण अधिक समय तक नहीं रहेगा. ज्योतिष में तीन ग्रहों की एक ही राशि में मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए इस दौरान बनने वाला यह संयोग कई राशियों के लिए विशेष प्रभाव वाला हो सकता है.
बुधादित्य योग
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 17 अक्टूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने के बाद सूर्य और बुध एक ही राशि में आ जाएंगे. दोनों ग्रहों की इस युति से बुधादित्य योग बनेगा. ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान और नेतृत्व का कारक, जबकि बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क और व्यापार का कारक माना जाता है. ऐसे में यह योग इन क्षेत्रों से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
लक्ष्मी नारायण योग
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्टूबर में तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग भी बनेगा. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बुध और शुक्र की युति को धन, सुख-सुविधा, कला, व्यापार और वैभव से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए यह योग आर्थिक और भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों के लिहाज से खास माना जा रहा है.
मालव्य योग
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि शुक्र के अपनी स्वराशि तुला में स्थित होने से अक्टूबर में मालव्य योग बनने की स्थिति रहेगी. यह पंच महापुरुष योगों में शामिल है. ज्योतिष में मालव्य योग को सौंदर्य, सुख-सुविधा, कला, भौतिक समृद्धि और आकर्षण से संबंधित माना जाता है. शुक्र की मजबूत स्थिति के कारण इस योग को विशेष महत्व दिया जाता है.
शुक्रादित्य योग
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 17 अक्टूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करते ही वहां पहले से मौजूद शुक्र के साथ उनकी युति बनेगी. सूर्य और शुक्र की इस युति को शुक्रादित्य योग कहा जाता है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह योग 6 नवंबर तक प्रभावी रह सकता है. सूर्य और शुक्र दोनों अलग-अलग क्षेत्रों के कारक ग्रह माने जाते हैं, इसलिए इनकी युति को करियर, मान-सम्मान, सुख-सुविधा और रचनात्मक क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है.
ग्रहों के गोचर का प्रभाव
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि देश की राजनीति में बड़े बदलाव होंगे. नए चेहरे और युवाओं को मौका मिलेगा. कुछ नेताओं को हानि होगी. पड़ोसी देशों से तनाव बढ़ेगा. अनचाही घटनाएं होगी. वाद विवाद ज्यादा होंगे. भूकंप आगजनी रेल और वायुयान दुर्घटना होगी. किसी प्रसिद्ध व्यक्ति का निधन. सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा होगी. बाजार और व्यापार को फायदा होगा. किसानो को फायदा होगा. अन्न उत्पादन ज्यादा होगा. लोहा इस्पात मेडिकल और केमिकल्स व्यापार तरक्की करेंगे. आंखों एवं त्वचा के रोग बढ़ेंगे. सोने की कीमत और विदेशी करेंसी में उतार-चढ़ाव रहेगा. पेट्रोल, डीजल और तेल के दाम बढ़ने का अनुमान है. देश में विवाद होंगे. चोरी-डकैती, अपहरण और दुष्कर्म भी बढ़ने की आशंका है. जिससे लोगों में डर और तनाव रहेगा. नई-पुरानी बीमारियों से लोग परेशान हो सकते हैं. महंगाई और टैक्स बढ़ने के योग हैं. व्यापार में तेजी आएगी. प्राकृतिक घटनाएं होगी. भूकंप आने की संभावना है. तूफान, बाढ़, भूस्खलन, पहाड़ टूटने, सड़के और पुल भी टूटने की घटनाएं हो सकती हैं. बस और रेलवे यातायात से जुड़ी बड़ी दुर्घटना होने की भी आशंका है. बीमारियों का संक्रमण बढ़ सकता है. शासन-प्रशासन और राजनैतिक दलों में तेज संघर्ष होंगे. सामुद्रिक तूफान और जहाज-यान दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं. खदानों में दुर्घटना और भूकंपन से जन-धन हानि होने की आशंका बन रही है. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. आय में इजाफा होगा. राजनीति में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिलेगा.
क्या करें उपाय
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हं हनुमते नमः, ऊॅ नमः शिवाय, हं पवननंदनाय स्वाहा का जाप करें. प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं. लाल मसूर की दाल शाम 7:00 बजे के बाद हनुमान मंदिर में चढ़ाएं. हनुमान जी को पान का भोग और दो बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं. ईश्वर की आराधना संपूर्ण दोषों को नष्ट एवं दूर करती है. महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए. माता दुर्गा, भगवान शिव और हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए.