जयपुर: चिकित्सा विभाग में नवनियुक्त चिकित्सक ग्रामीण इलाकों में सेवा देने के बावजूद अब खुद को ठगा का महसूस कर रहे है.इन चिकित्सकों ने पिछले साल अगस्त में ग्रामीण इलाकों में इस उम्मीद से काम संभाला था कि पीजी एग्जाम में बोनस अंक मिलेंगे.लेकिन चिकित्सा विभाग की अप्रासंगिक कटऑफ डेट के चलते डेढ साल सेवा देने के बावजूद ये चिकित्सक बोनस अंक के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर है. दरअसल, प्रदेश में ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर करने और युवा चिकित्सकों को प्रोत्साहित करने के लिए चिकित्सा विभाग ने बोनक अंक की व्यवस्था लागू कर रखी है.
इस व्यवस्था के तहत सरकार की तरफ से हर साल रिमोर्ट, डिफिकल्ट, ग्रामीण संस्थान नोटिफाइड किए जाते है, जहां कार्यरत युवा चिकित्सकों को पीजी एग्जाम में एक साल की सेवा पर दस फीसदी, दो साल की सेवा पर बीस फीसदी और तीन साल की सेवा पर अधिकतम 30 फीसदी बोनक अंक देने का प्रावधान है.ताजा मामला 2025 बैच के 1500 से अधिक चिकित्सकों से जुड़ा है, जिन्होंने पिछले साल अगस्त माह में विभाग में ज्वाइनिंग दी थी.इन चिकित्सकों को एक साल पूरा हो चुका है और जब तक पीजी की काउंसलिंग होगी, तब तक वे डेढ़ साल की सेवा कर लेंगे.लेकिन इनमें से किसी भी चिकित्सक को बोनस अंक का फायदा नहीं मिलेगा.
आखिर क्यों नहीं मिल रहा बोनस अंक का फायदा ?:
-2020 से पहले तक NEET पीजी का एग्जाम अप्रेल-मई में हो जाते थे
-लेकिन कोरोना के बाद NEET पीजी एग्जाम के शिड्यूल में बदलाव हो गया
-चिकित्सकों के मुताबिक जो परीक्षा पहले अप्रैल-मई में होती थी, उनका समय हो गया अगस्त-सितंबर
-फिर भी विभाग अभी तक 30 अप्रैल की पुरानी कटऑफ पर अड़ा हुआ है, जिसमें बदलाव जरूरी
-क्योंकि इस कटऑफ के चलते डेढ़ साल सर्विस के बावजूद वे दस फीसदी बोनस अंक के भी पात्र नहीं है
-चिकित्सकों की पीड़ा ये कि जब बोनस अंक देने ही नहीं,तो फिर इस तरह के नियम ही क्यों बनाए ?
गांवों में सेवा देकर ठगा सा महसूस कर रहे युवा चिकित्सक:
-चिकित्सा विभाग में ग्रामीण सेवा पर बोनस अंक देने की व्यवस्था में बड़ी खामी
-इस खामी के चलते 2025 बैच के मेडिकल ऑफिसर्स इधर-उधर भटकने को मजूबर
-दरअसल,अगस्त 2025 में नियुक्त MO का 1 वर्ष का ग्रामीण सेवाकाल हो चुका पूरा
-हाल ही में हुई PG एग्जाम की काउंसलिंग होने तक यह अवधि हो जाएगी करीब 1.5 वर्ष
-इसके बावजूद 30 अप्रैल की अप्रासंगिक कटऑफ के कारण चिकित्सकों के सामने बड़ी दिक्कत
-एक साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उन्हें नहीं मिल रहा 10% बोनस अंक का फायदा
-इस बारे में चिकित्सकों की पीड़ा यह है कि कोरोना महामारी के बाद से बदल चुका शैक्षणिक सत्र
-NEET-PG की जो परीक्षा पहले अप्रैल-मई में होती थी, उनका समय हो गया अगस्त-सितंबर
-फिर भी विभाग अभी तक 30 अप्रैल की पुरानी कटऑफ पर अड़ा हुआ है, जिसमें बदलाव जरूरी
-चिकित्सकों की पीड़ा ये कि जब बोनस अंक देने ही नहीं,तो फिर इस तरह के नियम ही क्यों बनाए ?
इस पूरे मामले को लेकर डॉक्टर्स का कहना है कि वे इस विसंगति को दूर करने के लिए पहले भी विभाग को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसके बाद लगातार उच्चाधिकारियों से मिल रहे है, फिर भी कटऑफ में बदलाव नहीं करने से वे भटकने को मजबूर है.