डीडवाना: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण के तहत पांच पंचायत समितियों की 130 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान जारी है. ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें नजर आ रही हैं. इस बीच पहली बार मतदान करने पहुंचीं युवतियों ने महिला जनप्रतिनिधियों को अहम संदेश दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद महिला जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी पति या परिवार के अन्य सदस्यों के हाथों में सौंपने के बजाय खुद सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. साथ ही नव मतदाताओं ने उम्मीद जताई कि जीतने वाले प्रत्याशी चुनावी वादों को पूरा करेंगे और गांवों की समस्याओं का समाधान करेंगे.
महिला मतदाताओं ने इस बार पंचायती राज चुनाव में महिलाओं को मिले 50 प्रतिशत आरक्षण को महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक अच्छी पहल बताया. उनका कहना है कि इससे महिलाओं को राजनीति और ग्रामीण विकास में अपनी भागीदारी निभाने का अवसर मिला है. बड़ी संख्या में महिलाएं चुनाव मैदान में उतरी हैं और विभिन्न पदों पर प्रतिनिधित्व कर रही हैं. नवमतदाता युवतियों का कहना है कि चुनाव से पहले प्रत्याशी जनता से कई वादे करते हैं, लेकिन असली जिम्मेदारी चुनाव जीतने के बाद शुरू होती है. ऐसे में जो भी प्रत्याशी जीतकर जनप्रतिनिधि बनें, उन्हें जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए.
गांव की सड़क, पानी, बिजली, सफाई और अन्य बुनियादी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए. हालांकि, पहली बार मतदान करने वाली युवतियों ने महिला जनप्रतिनिधियों को एक खास संदेश देते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद महिलाएं अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों का इस्तेमाल खुद करें. वे अपने पति या परिवार के अन्य सदस्यों को अपने स्थान पर निर्णय लेने और कामकाज करने का अधिकार न दें. जिस भरोसे के साथ मतदाताओं ने उन्हें चुनकर भेजा है, उस भरोसे पर खरा उतरना उनकी जिम्मेदारी है.
युवतियों का कहना है कि महिला जनप्रतिनिधियों को केवल चुनाव जीतने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें लगातार सक्रिय रहकर गांव की महिलाओं के बीच जाना चाहिए. महिलाओं से सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना चाहिए. जब महिला जनप्रतिनिधि स्वयं महिलाओं के बीच पहुंचेंगी, तो महिलाएं भी बिना किसी संकोच के अपनी परेशानियां उनके सामने रख सकेंगी.
नवमतदाता युवतियों ने उम्मीद जताई कि इस बार निर्वाचित होने वाली महिला जनप्रतिनिधि केवल नाम की प्रतिनिधि बनकर नहीं रहेंगी, बल्कि अपनी जिम्मेदारी स्वयं निभाते हुए महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश करेंगी. उनका मानना है कि महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब निर्वाचित महिलाएं स्वयं फैसले लेंगी और गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगी.