Diwali 2026: दीपों से आंगन होगा जगमग... सजेगी दीपावली की रौनक, धनतेरस पर खरीदारी से लेकर भाई दूज का शुभ मुहूर्त, जानें क्या है महत्व और धार्मिक मान्यता

जयपुरः रोशनी, उमंग और खुशियों का पर्व दीपावली एक बार फिर घर-आंगन को जगमगाने आ गया है. बाजारों में सजावट और खरीदारी की रौनक बढ़ने लगी है. कहीं दीपों से आंगन सजाने की तैयारी है तो कहीं मां लक्ष्मी के स्वागत में पूजा की. दीपावली केवल दीप जलाने और आतिशबाजी का त्योहार नहीं, बल्कि यह सुख-समृद्धि, आरोग्य, धन-वैभव और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक भी है. पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के साथ परंपरा और पारिवारिक रिश्तों की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिलेगी. 

दीपावली का त्योहार इस बार 6 नवंबर से शुरू होगा. इस दौरान धनतेरस, छोटी दीपावली, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पर्व मनाए जाएंगे. खुशी और उल्लास के साथ इन पांच दिनों के पर्व पर धार्मिक मान्यता, पूजा विधा और शुभ मुहूर्त का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. 

धनतेरस का पर्वः
इस खास पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है. इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इस दिन लोग सोना-चांदी, बर्तन और अन्य धातुओं से बनी वस्तुओं को खरीदते हैं. 

शुभ मुहूर्त- शाम 05.49 बजे से रात 08.23 बजे तक

नरक चतुर्दशीः
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन अभ्यंग स्नान, यमदीपदान और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा को अहम माना जाता है. नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान के लिए सूर्योदय से पहले का समय शुभ माना जाता है. 

शुभ मुहूर्त: शाम 5:45 बजे से रात 8:20 बजे तक

माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की होगी पूजाः
दीपावली का मुख्य पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है. शाम के समय प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. 

शुभ मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से लेकर रात 7:50 बजे तक

अन्नकूट का लगेगा भोगः 
इसके बाद गोवर्धन का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. इस अवसर पर घरों और मंदिरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था इसके बाद से ही ये परंपरा चली आ रही है. 

शुभ मुहूर्त: सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक  

भाई-बहन का रिश्ताः
भाई दूज, भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के प्रति संकल्प का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहन अपने भाई के तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं और भाई इसके बदले में उसे उपहार देते है. 

शुभ मुहूर्त: दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से लेकर 3 बजकर 20 मिनट तक