जयपुरः दीपों का त्योहार दीपावली इस बार 8 नवंबर को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में दीपावली का त्योहार बहुत उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है. कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर दीपावली का त्योहार मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक अमावस्या तिथि पर भगवान श्री राम 14 वर्षों का वनवास काटकर और लंका पर विजय करने के बाद अयोध्या लौटे थे. जिसकी खुशी में सारे अयोध्यावासी इस दिन पूरे नगर को अपने राजा प्रभु राम के स्वागत में दीप जलाकर उत्सव मनाया था. इसी कारण से तब से ये परंपरा चली आ रही है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर - जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष कार्तिक कृष्ण अमावस्या दिनांक 08 नवम्बर 2026 को प्रदोषकाल में अमावस्य होने से इसी दिन दीपावली मनायी जायेगी. लक्ष्मीपूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या को स्थिर लग्न और स्थिर नवांश में किया जाना सर्वश्रेष्ठ होता है. दिनांक 08 नवम्बर 2026 को प्रातः 11:29 से दिनांक 09 नवम्बर 2026 को दोपहर 12:31 अमावस्या रहेगी, अतः 08 नवम्बर 2026 (रविवार) को ही दीपोत्सव मनाया जायेगा.
08 नवम्बर को दीपावली
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष कार्तिक कृष्ण अमावस्या दिनांक 08 नवम्बर 2026 को प्रदोषकाल में अमावस्य होने से इसी दिन दीपावली मनायी जायेगी. लक्ष्मीपूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या को स्थिर लग्न और स्थिर नवांश में किया जाना सर्वश्रेष्ठ होता है. दिनांक 08 नवम्बर 2026 को प्रातः 11:29 से दिनांक 09 नवम्बर 2026 को दोपहर 12:31 अमावस्या रहेगी, अतः 08 नवम्बर 2026 (रविवार) को ही दीपोत्सव मनाया जायेगा.
कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 08 नवम्बर 2026 को प्रातः 11:29 बजे से
कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्ति - 09 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि दीपावली पर घरों को रोशनी से सजाया जाता है. दीपावली की शाम को शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और धन के देवता कुबेर की पूजा-आराधना होती है. मान्यता है दीपावली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और घर-घर जाकर ये देखती हैं किसका घर साफ है और किसके यहां पर विधिविधान से पूजा हो रही है. माता लक्ष्मी वहीं पर अपनी कृपा बरसाती हैं. दीपावली पर लोग सुख-समृ्द्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं. अथर्ववेद में लिखा है कि जल, अन्न और सारे सुख देने वाली पृथ्वी माता को ही दीपावली के दिन भगवती लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है. कार्तिक अमावस्या का दिन अंधेरे की अनादि सत्ता को अंत में बदल देता है, जब छोटे-छोटे ज्योति-कलश दीप जगमगाने लगते हैं. प्रदोषकाल में माता लक्ष्मी के साथ गणपति, सरस्वती, कुबेर और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है.
प्रदोष काल व स्थिर लग्न होने से 08 नवम्बर को ही दीपावली मनाना श्रेष्ठ
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष कार्तिक कृष्ण अमावस्या दिनांक 08 नवम्बर 2026 को प्रातः 11:29 से दिनांक 09 नवम्बर 2026 को दोपहर 12:31 अमावस्या रहेगी. इस वजह से दीपावली का त्योहार 08 नवम्बर को ही मनाना शुभ रहेगा. इस दिन प्रदोष काल यानी शाम को अमावस्या तिथि रहेगी. बता दें कि गणेशजी के साथ लक्ष्मी जी की पूजा स्थिर लग्न में करनी चाहिए. इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है. स्थिर लग्न में दीपावली 08 नवम्बर को ही मनाना श्रेष्ठ रहेगा. जबकि 09 नवम्बर को स्नान और दान की अमावस्या रहेगी. इस दिन पितरों के लिए स्नान और दान की परंपरा है.
दीपावली पर जरूर करें ये उपाय
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि दीपावली पर लक्ष्मी जी और गणेश महाराज की पूजा का विधान है. इसके अलावा आप इस दिन हनुमानजी, यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, कुलदेवता और अपने पितरों का पूजन भी जरूर करें. वहीं धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का भी पूजा करें. इसके साथ ही दीपावली पूजा में आप श्रीसूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं.
महालक्ष्मी पूजन
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन किया जाना चाहिए.
प्रदोष समये दीपदानोल्का प्रदर्शन लक्ष्मी पूजनानि कृत्वाॅ भोजनं कार्यम्.
8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
प्रदोष काल ( लग्न ) - शाम 05:36 - रात 08:02 तक
वृषभ काल ( लग्न ) - शाम 06:04 - रात 08:01 तक
सिंह काल ( लग्न ) - रात 12:34 - रात 02:50 तक
सबसे श्रेष्ठ समय
सायं 06:16 से सायं 06:28 तक
सायं 06:52 से सायं 07:05 तक
इसमें प्रदोष काल, स्थिर लग्न वृषभ और स्थिर नवमांश कुंभ का समय रहेगा.
चौघडिया मुहुर्त
दिवाकाल चौघड़िया
चर लाभ अमृत का चौघड़िया : प्रातः 8:06 से दोपहर 12:10 तक
अभिजीत मुहूर्त : प्रात 11:46 से दोपहर 12:34 तक
शुभ का चौघड़िया : दोपहर 1:32 से दोपहर 2:53 तक
रात्रि चौघड़िया
शुभ अमृत चर का चौघड़िया : सायं 5:36 से रात्रि 10:31 तक
लाभ का चौघड़िया : अर्धरात्रि 1:49 से अंतरात्रि 3:27 तक
शुभ का चौघड़िया : अंतरात्रि 5:55 से अंतरात्रि 6:45 तक