झालावाड़: दीपोत्सव यानी मां लक्ष्मी की आराधना का पर्व. कमलासन देवी की पूजार्चन का महापर्व हैं. लेकिन ऐसा नही की मां लक्ष्मी कमलासना ही स्वरूप है . देवी के अन्य विलक्षण स्वरूपो का प्रमाण भी प्रतिमाँओ में देखने की मिलता है, झालावाड़ जिले में ही ऐसी दो दुर्लभ स्वरूप की प्रतिमाएं विद्यमान है. जिनमे एक सिंह वाहिनी मां लक्ष्मी की प्रतिमा जिले के झालरापाटन स्थित सूर्य मंदिर में लगी हुई है. और एक गज लक्ष्मी की मूर्ति झालावाड़ के राजकीय संग्रहालय में स्थित है जहां उसको बन्द करके बक्से में रखा है.
गज लक्ष्मी का चित्र पूरे हाडौती सम्भाग में दुर्लभ चित्र है :
झालावाड़ के संग्रहालय में रखी गई गज लक्ष्मी का अत्यंत सुंदर सुंदर चित्र स्वर्ण रंग से बनी है और यह चित्र झालावाड़ के पुरातत्व संग्रहालय में दुर्लभ चित्र मौजूद है. इस चित्र की खासियत यह है कि देवी लक्ष्मी के ऐसे ही स्वरुप को अधिक पसंद किया जाता है. यह चित्र 12 इंच लंबे 10×1/4 इंच चौडे देसी कागज कागज पर बनी है. पक्के चमकदार रंगों से यह चित्र अज्ञात चित्रों में बनया है.
इसमें श्वेत सागर के जल पर जल पर नीलकमल एव हरि पत्तीदार अर्थ र्विकसित कमल कली को उकेरा गया है. सागर में खिलते नील कमल की पीठ पर महादेवी गजलक्ष्मी को चतुर्बाहु स्वरूप में दर्शाकर पद्मवस्था में विराजमान किया गया है. देवी ने स्वर्ण रक्तवर्णीय साड़ी ब्लाउज परंपरागत रुप धारण किया है नीले रंग बना है चित्रांकन को देखने से यह पता चलता है.
इस चित्र में सरदार साड़ी पर नीले रंग की लाइन में बिंदिया और उसके मध्य में श्वेत रंगीन भपकदार बिंदिया राजसी आभा बढ़ती है. यह चित्र अभी बक्से में बंद है जब कि आज इसकी पूजा होनी चाहिए.