जैसलमेर : दीपावली का त्योहार... हर घर में रोशनी, हर चेहरे पर मुस्कान और अपनों के साथ खुशियां बांटने का अवसर. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरा देश दीपावली मना रहा होता है, तब भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर क्या तस्वीर होती है? थार के रेगिस्तान में जहां एक तरफ पाकिस्तान की सीमा है, वहीं दूसरी तरफ देश की सुरक्षा में तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवान हैं. दुश्मन देश की ओर से किसी भी नापाक हरकत की आशंका के बीच इन जवानों की निगाहें हर पल सरहद पर रहती हैं. लेकिन दीपावली के इस महापर्व पर यहां भी खुशियों की रोशनी कम नहीं थी. सुबह से सीमा चौकियों पर तैयारियां शुरू हुईं, रंगोली सजाई गई, दीप लगाए गए और शाम ढलते ही पूजा-अर्चना के साथ दीपोत्सव का आगाज हुआ. आतिशबाजी हुई, गीत गाए गए, मिठाइयां बांटी गईं और जवानों ने अपने परिवारों को भावुक संदेश भी दिए. महिला हो या पुरुष, हर जवान के चेहरे पर उत्साह था. लेकिन इन खुशियों के बीच ड्यूटी पहले के सिद्धांत पर कोई समझौता नहीं हुआ.
यह तस्वीर है पाकिस्तान से सटी जैसलमेर की अंतरराष्ट्रीय सीमा की. चारों तरफ फैला विशाल थार का रेगिस्तान, दूर तक नजर आती सरहद और इस सरहद की सुरक्षा में दिन-रात तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवान. दीपावली का त्योहार था, लिहाजा सीमा चौकियों पर भी उत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं. सुबह की पहली किरण के साथ ही जवानों में दीपावली को लेकर उत्साह दिखाई देने लगा. सीमा चौकी के परिसर को सजाने की तैयारियां शुरू हुईं. कहीं रंगोली बनाई जा रही थी, कहीं दीपों को सजाया जा रहा था तो कहीं साथी जवान मिलकर चौकी को आकर्षक रूप देने में जुटे थे.आमतौर पर जहां इन जवानों का दिन हथियारों, निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारियों के बीच गुजरता है, वहीं इस दिन इनकी तैयारियों में त्योहार की खुशियां भी शामिल थीं. महिला और पुरुष जवान एक साथ मिलकर दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे थे.इनके लिए यह सिर्फ सजावट नहीं थी, बल्कि अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर भी त्योहार को अपनेपन के साथ मनाने की कोशिश थी.
सीमा चौकी पर तैयारियां पूरी होने लगीं. रंगोली के रंगों से सजा परिसर, दीपों की कतारें और साथी जवानों के चेहरों पर उत्साह. हर कोई इस कोशिश में था कि सरहद पर मनाई जाने वाली यह दीपावली यादगार बने.इन जवानों के लिए यह त्योहार कई मायनों में खास है. कोई राजस्थान के किसी गांव से आया है तो कोई देश के दूसरे राज्य से. किसी के घर में माता-पिता दीपावली की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो किसी के बच्चे अपने पिता के लौटने का इंतजार कर रहे हैं. किसी की पत्नी त्योहार पर घर की सजावट कर रही है तो किसी की बहन भाई के आने की राह देख रही है.लेकिन देश की सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व ऐसा है कि इन जवानों को त्योहार पर भी अपने परिवारों से दूर रहना पड़ता है.यही वजह है कि सीमा चौकी पर तैनात साथी जवान ही एक-दूसरे का परिवार बन जाते हैं. एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटना, मिठाइयां खिलाना और त्योहार का उत्साह बनाए रखना इनके लिए सबसे बड़ी खुशी है.
सुबह से चल रही तैयारियों के बाद अब इंतजार था शाम का. सूरज ढलने लगा और थार के रेगिस्तान में अंधेरा छाने लगा. लेकिन सीमा चौकी पर अंधेरा नहीं, बल्कि दीपों की रोशनी फैलने लगी.जवानों ने एक-एक कर दीप प्रज्ज्वलित किए. रंगोली के आसपास सजे दीपों ने पूरे परिसर को रोशन कर दिया. इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई. देश की खुशहाली, परिवारों की सुख-समृद्धि और सरहद की सुरक्षा की कामना की गई.एक-दूसरे को मिठाई खिलाई गई और दीपावली की शुभकामनाएं दी गईं. इस दौरान महिला और पुरुष जवानों ने मिलकर दीपोत्सव मनाया. किसी ने गीत गाकर खुशियां जाहिर कीं तो किसी ने अपने साथी जवानों के साथ नृत्य किया.यहां हर चेहरे पर मुस्कान थी. घर से दूर होने की कसक जरूर थी, लेकिन साथियों के बीच दीपावली मनाने का उत्साह उस कमी को काफी हद तक पूरा कर रहा था.
दीपावली का जिक्र हो और आतिशबाजी की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है. सीमा चौकी पर भी जवानों ने आतिशबाजी कर दीपावली की खुशियां मनाईं. आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखरी तो जवानों का उत्साह भी देखते ही बना.किसी ने पटाखों की रोशनी के बीच तस्वीरें खिंचवाईं तो किसी ने साथी जवानों के साथ इन यादगार पलों को कैमरे में कैद किया. गीत-संगीत का दौर चला और जवानों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.कुछ पल के लिए ऐसा लगा मानो सरहद की यह चौकी कोई परिवार का आंगन हो, जहां सभी एक साथ बैठकर दीपावली मना रहे हों.लेकिन इस जश्न के पीछे एक बड़ी जिम्मेदारी भी थी. इन जवानों को मालूम है कि जिस सरहद पर वे खुशियों के दीप जला रहे हैं, उसी सरहद के उस पार पाकिस्तान है और किसी भी समय सुरक्षा से जुड़ी चुनौती सामने आ सकती है. इसलिए उत्सव के बीच भी सतर्कता और अनुशासन बरकरार रहा.
इस दीपावली की सबसे खास तस्वीरों में एक तस्वीर इन बहादुर बेटियों की भी है. हाथों में हथियार और चेहरे पर मुस्कान. एक तरफ त्योहार की खुशियां और दूसरी तरफ देश की सुरक्षा का संकल्प. भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात महिला जवान हर परिस्थिति में पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. सरहद पर उनकी मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि देश की रक्षा के संकल्प में बेटियां भी बराबर की भागीदार हैं. दीपावली के दिन भी इनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं होता. परिवार की याद आती है, अपनों के साथ त्योहार मनाने का मन करता है, लेकिन देश की सुरक्षा का दायित्व इनके लिए सबसे ऊपर है.इनके लिए सबसे बड़ा उपहार यही है कि देश का हर नागरिक सुरक्षित रहे, हर घर में खुशियां रहें और हर परिवार बिना किसी चिंता के दीपावली मना सके.
एक तरफ सीमा चौकी पर दीपावली की खुशियां मनाई जा रही थीं, तो दूसरी तरफ भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा की फेंसिंग पर सुरक्षा का पहरा लगातार जारी था.यह वही फेंसिंग है, जिसके उस पार पाकिस्तान है. सीमा पार से होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखना सीमा सुरक्षा बल के जवानों की जिम्मेदारी है. किसी भी तरह की घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए जवान दिन-रात मुस्तैद रहते हैं.त्योहार हो या सामान्य दिन, मौसम कैसा भी हो, सरहद की सुरक्षा में कोई विराम नहीं होता. दीपावली के अवसर पर भी जवान अपनी ड्यूटी पूरी सतर्कता के साथ निभा रहे थे.जहां कुछ जवान सीमा चौकी पर दीपावली की खुशियां साझा कर रहे थे, वहीं कुछ जवान फेंसिंग के पास अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे. यही इस दीपावली की सबसे बड़ी तस्वीर है. एक तरफ रोशनी का पर्व और दूसरी तरफ देश की सुरक्षा का संकल्प.क्योंकि सरहद पर तैनात जवानों को मालूम है कि पाकिस्तान की तरफ से किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता. दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखना और देश की सीमा को सुरक्षित रखना ही इनकी प्राथमिकता है.
इन जवानों के लिए दीपावली की सबसे बड़ी खुशी अपने कर्तव्य को निभाना है. परिवार से दूर रहना आसान नहीं होता. त्योहार के दिन अपनों की याद कुछ ज्यादा ही सताती है. घर में दीप जल रहे होंगे, परिवार एक-दूसरे को मिठाई खिला रहा होगा और बच्चे अपने माता-पिता के साथ खुशियां मना रहे होंगे.लेकिन सरहद पर तैनात इन जवानों के लिए ड्यूटी पहले है. ये जानते हैं कि अगर वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटे तो देश की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.यही कारण है कि ये जवान दीपावली के दिन भी अपनी ड्यूटी को पूरी गंभीरता से निभाते हैं. इनके लिए सरहद ही घर है और साथी जवान ही परिवार. इनका मानना है कि देश के करोड़ों लोग चैन से दीपावली मना सकें, इससे बड़ी खुशी कोई दूसरी नहीं हो सकती.
सरहद पर दीपावली मनाने वाले इन जवानों के लिए परिवार से बात करना भी किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है. त्योहार के अवसर पर जवानों ने वीडियो कॉल और फोन के जरिए अपने घर-परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं दीं.किसी ने अपने बच्चों से बात की तो किसी ने माता-पिता का आशीर्वाद लिया. किसी ने पत्नी को दीपावली की बधाई दी तो किसी ने भाई-बहनों के साथ खुशियां साझा कीं.परिवार के लिए इनका संदेश भी भावुक करने वाला है. घर की चिंता न करें, हम यहां पूरी तरह सुरक्षित हैं और देश की सुरक्षा में मुस्तैद हैं. आप सभी खुशी से दीपावली मनाएं. हम सरहद पर हैं, ताकि आप अपने घरों में सुरक्षित रहें.फर्स्ट इंडिया के कैमरे के सामने जवानों ने देशवासियों को भी दीपावली की शुभकामनाएं दीं और कहा कि देश की सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल का हर जवान पूरी मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है.
सीमा पर तैनात जवानों के उत्साह को बढ़ाने के लिए सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी भी इस दीपोत्सव में शामिल हुए. अधिकारियों ने जवानों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं और मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं.इस आयोजन ने एक बार फिर यह दिखाया कि सीमा सुरक्षा बल में जवानों के बीच परिवार जैसा रिश्ता है. यहां हर कोई एक-दूसरे की खुशियों और जिम्मेदारियों में सहभागी है.सीमा पर त्योहार मनाने का यह अंदाज जवानों के मनोबल को भी मजबूती देता है. घर से दूर रहकर देश की सेवा कर रहे इन प्रहरियों के लिए साथियों का साथ और अधिकारियों का स्नेह भी किसी परिवार के साथ से कम नहीं.
दीपावली का यह पर्व सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि विश्वास, उम्मीद और खुशियों का प्रतीक भी है. जैसलमेर की भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात इन जवानों ने भी दीप जलाकर यही संदेश दिया कि देश की सुरक्षा के लिए उनका संकल्प अडिग है.जब देश के अलग-अलग हिस्सों में परिवार एक साथ बैठकर दीपावली मना रहे थे, तब ये जवान अपने साथियों के साथ सरहद पर खुशियां बांट रहे थे. किसी के हाथ में मिठाई थी, किसी के हाथ में पूजा की थाली और किसी के कंधे पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी.आतिशबाजी की रोशनी, गीतों की गूंज और दीपों की जगमगाहट के बीच भी इनकी नजरें अपनी जिम्मेदारी से नहीं हटीं. क्योंकि ये जानते हैं कि सीमा पार पाकिस्तान की ओर से किसी भी संभावित चुनौती के लिए हमेशा तैयार रहना जरूरी है.देश के हर नागरिक की सुरक्षित दीपावली के पीछे इन जवानों की यही सतर्कता और समर्पण है.
रात गहराती गई और सरहद पर दीपों की रोशनी दूर तक बिखरती रही. आतिशबाजी की चमक, साथी जवानों के साथ गीत-संगीत और एक-दूसरे को मिठाई खिलाने की खुशियां इस दीपावली को यादगार बना रही थीं. लेकिन इस जश्न के बीच भी सीमा पर पहरा जारी रहा. फेंसिंग पर तैनात जवान अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे. किसी ने अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ी, किसी ने अपनी चौकसी में कमी नहीं आने दी.इन जवानों की दीपावली का अर्थ ही अलग है. इनके लिए घर का मतलब सिर्फ चार दीवारें नहीं, बल्कि पूरा देश है. परिवार का मतलब सिर्फ अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चे नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिक हैं.जब देश का हर घर रोशन होता है, जब हर बच्चा सुरक्षित रहकर पटाखे जलाता है, जब हर परिवार बिना किसी डर के त्योहार मनाता है, तभी इन जवानों की दीपावली पूरी होती है.
सरहद पर जलने वाला हर दीप इस बात का प्रतीक है कि देश की सुरक्षा का संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ता.घर-घर में दीप जलें, इसलिए सरहद पर जवान जागते हैं. देश दिवाली मनाए, इसलिए जवान अपनी दिवाली सरहद के नाम करते हैं.भारत-पाक सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के इन जांबाज जवानों के जज्बे, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को फर्स्ट इंडिया का दिल से सलाम.