VIDEO: भूमि आवंटन नीति में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकारी विभागों को अब नहीं मिलेंगे स्वतंत्र भूखंड, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: प्रदेश के शहरों में लागू भूमि आवंटन नीति में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है. यह बदलाव लागू किया गया तो केन्द्र व राज्य सरकार के विभागों को कार्यालयों के लिए भूमि मिलना बंद हो जाएगा. 

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में निजी या सरकारी संस्था व अन्य प्रीमियर संस्था व ट्रस्ट आदि को भूमि आंवटन राज्य सरकार की आवंटन नीति के तहत किया जाता है. मौजूदा आवंटन नीति नगरीय विकास विभाग ने पिछले वर्ष एक सितंबर को लागू की थी. इससे पहले वर्ष 2015 की आवंटन नीति लागू थी. इस नीति में कई बदलाव करते हुए मौजूदा आवंटन नीति लागू की गई है. इस नीति में केन्द्र व राज्य सरकारों की विभिन्न एजेंसियों को विभिन्न प्रयोजनों के लिए भूमि आवंटन के प्रावधान है. लेकिन अब इस आवंटन नीति में बदलाव किए जाने की तैयारी है. जानकारों के अनुसार जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की ओर से बदलाव का प्रारूप तैयार किया गया है और इस प्रारूप को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वीकृति भी दे दी है. निकाय चुनाव की आचार संहिता हटने के बाद इस बदलाव को लागू किया जाएगा. 

-प्रदेश भर के विकास प्राधिकरण,नगर सुधार न्यास व विभिन्न शहरी निकायों की आय का सबसे बड़ा स्त्रोत जमीन ही है
-प्रदेश के सबसे प्राधिकरण जयपुर विकास प्राधिकरण की भी सालाना आय में सबसे बड़ी हिस्सेदारी जमीनों की नीलामी या आवंटन की है
-हर निकाय के पास जमीन सीमित है,दूसरी तरफ जमीनों की कीमतों में समय के साथ बढ़ोतरी हो रही है
-ऐसे में जमीनों खासकर घनी आबादी के बीच स्थित जमीनों के सार्थक उपयोग की कवायद है
-इसी कवायद के तहत ही मौजूदा आवंटन नीति में बदलाव किया जा रहा है
-हालांकि आवंटन नीति में बदलाव का प्रारूप जेडीए के लिहाज से तैयार किया गया है
-लेकिन सभी निकायों पर इस बदलाव को लागू करने पर राज्य सरकार फैसला लेगी

आवंटन नीति में प्रस्तावित बदलाव के लागू होने पर केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों व एजेंसियों को कार्यालय या इन एजेंसियों के कार्मिकों के आवास के लिए स्वतंत्र भूखंड देना बंद हो जाएगा. आपको इस प्रस्तावित बदलाव की विस्तार से जानकारी देते हैं.

-आवंटन नीति में बदलाव का खाका दिल्ली में केन्द्र सरकार के कर्तव्य भवन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है
-जिस तरह कर्तव्य भवन में तमाम सरकारी विभागों के कार्यालय संचालित है,वैसे ही भवन राजधानी में निर्मित करने की कवायद है
-आवंटन नीति का यह प्रस्तावित बदलाव राजधानी के नगर निगम क्षेत्र में लागू करना प्रस्तावित है
-नगर निगम सीमा में घनी आबादी के कारण भूमि सीमित है और उसकी बाजार कीमत बहुत ज्यादा है
-जेडीए के पास नगर निगम सीमा में केन्द्र व राज्य सरकार की एजेंसियां कार्यालय व कार्मिकों के आवास के लिए भूमि मांगने के प्रस्ताव मिलते हैं
-वर्तमान में भी कुछ एजेंसियों के ऐसे ही प्रस्ताव जेडीए के पास लंबित है
-ऐसे में आवंटन नीति में प्रस्तावित बदलाव के अनुसार जेडीए इन एजेंसियों को भूमि देने के बजाए बहुमंजिला इमारत में निर्मित क्षेत्र उपलब्ध कराएगा
-इसके लिए जेडीए की ओर से नगर निगम सीमा में बहुमंजिल भवनों का निर्माण किया जाएगा
-इन भवनों में किस सरकारी एजेंसी को कितने वर्गफीट निर्मित क्षेत्र उपलब्ध कराना है
-इसका फैसला राज्य का वित्त विभाग करेगा
-वित्त विभाग सरकारी एजेंसी की आवश्यकता के अनुसार आवंटित किए जाने वाले निर्मित क्षेत्र तय करेगा
-इन बहुमंजिला भवनों में अलग-अलग क्षमता के अनुसार मीटिंग हॉल, कॉन्फ्रेंस हॉल व कैफैटेरिया आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी