जयपुर के SMS स्टेडियम पर बड़े सवाल, एनजीटी की रोक... अधिकारियों पर आदेश बेअसर, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः देश के सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट मैदानों में शामिल जयपुर का सवाई मानसिंह क्रिकेट स्टेडियम, लेकिन इस वक्त यह मैदान किसी मैच की वजह से नहीं, बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के सख्त आदेशों की वजह से चर्चा में है. एनजीटी ने पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी पर एसएमएस स्टेडियम में खेल गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस रोक के बावजूद स्टेडियम में आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही है. खेल मैदानों पर खेल गतिविधियां चल रही है और भूजल का दोहन जारी है. सवाल यही है कि जब रोक के आदेश जारी हो चुके हैं, तब भी मैदान पर गतिविधियां क्यों जारी हैं? 

जयपुर का सवाई मानसिंह क्रिकेट स्टेडियम. जहां कभी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का रोमांच दिखाई देता है. आज वही मैदान पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों के कारण सवालों के घेरे में है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जयपुर, रायपुर और मुंबई के तीन प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में खेल गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगाई है. वजह है. भूजल का अत्यधिक उपयोग, एसटीपी के उपचारित पानी का इस्तेमाल नहीं करना और वर्षा जल संचयन जैसी व्यवस्थाओं का पालन नहीं करना.  एनजीटी के मुताबिक संबंधित स्टेडियमों को कई बार नोटिस भेजे गए. पर्यावरणीय मानकों के पालन की रिपोर्ट मांगी गई. लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाते हुए खेल गतिविधियों पर रोक लगा दी. अगली सुनवाई 17 अगस्त को होनी है और तब तक या विशेष अनुमति मिलने तक किसी भी तरह की खेल गतिविधि नहीं होनी चाहिए.

लेकिन ज़मीनी तस्वीर कुछ और कहानी बयां करती है. एनजीटी की रोक के बावजूद जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में खेल गतिविधियां जारी हैं. मैदान पर अभ्यास हो रहा है. प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं. और मैदान की हरियाली बनाए रखने के लिए पानी का इस्तेमाल भी लगातार जारी है. भूजल दोहन से भरे गए स्विमिंग पूल में शोखियां तैराक तैर रहे हैं, तो फुटबॉल, हैंडबॉल, हॉकी व एथलेटिक्स ट्रेक पर खेल गतिविधियां धड़ले से चल रही है. मैदानों को हरा भरा रखने के लिए अब भी ट्यूबवेल के पानी का ही उपयोग किया जा रहा है. टेनिस कोर्ट हो या फिर निजी व्यक्तियों द्वारा चलाई जा रही स्क्वैश एकेडमी, सभी जगह खेल गतिविधियां हो रही है.  सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ट्रिब्यूनल ने साफ निर्देश दिए हैं, तो इन आदेशों का पालन कौन सुनिश्चित करेगा? खेल परिषद सचिव राजकेश मीणा या स्टेडियम सुपरवाइजर किसी को एनजीटी के आदेश से कोई सरोकार नहीं. जैसे पहले नोटिस का सम्मान नहीं किया वैसे ही अब आदेश भी तार तार कर दिए.दरअसल एनजीटी ने कई अहम सवाल उठाते हुए खेल गतिविधियां रोकी है.

एनजीटी के प्रमुख सवाल
भूजल का अत्यधिक दोहन क्यों?
एसटीपी के ट्रीटेड पानी का उपयोग क्यों नहीं?
रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कहां?
अनुपालन रिपोर्ट समय पर क्यों नहीं दी गई?    

याचिका में आरोप है कि क्रिकेट पिच, आउटफील्ड और खेल मैदानों को हरा-भरा रखने के लिए पीने योग्य भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है. जबकि पर्यावरणीय नियम साफ कहते हैं कि इसके लिए उपचारित सीवेज जल और वर्षा जल संचयन जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पर्यावरणीय मानकों का पालन साबित नहीं होता, तब तक रोक जारी रह सकती है. इस सवाई मानसिंह स्टेडियम में  एनजीटी ने खेल गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगाने के आदेश दिए हैं. लेकिन सवाल सिर्फ इस मैदान का नहीं है. सवाल यह है कि क्या न्यायिक आदेशों का पालन होगा. क्या भूजल के दोहन पर रोक लगेगी. और क्या पर्यावरण संरक्षण केवल कागजों तक सीमित रहेगा? इन सवालों के जवाब अब 17 अगस्त की सुनवाई और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई तय करेगी. एनजीटी के आदेशों ने साफ संदेश दिया है कि खेल और पर्यावरण साथ-साथ चलेंगे. लेकिन जयपुर में अगर आदेशों के बावजूद गतिविधियां जारी रहती हैं, तो यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि न्यायिक निर्देशों के पालन पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है.