बस्तर : दिवाली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों के बीच मोदी है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज, पूरे देश में और दुनिया के हर कोने में, करोड़ों भारतीय रोशनी का यह पावन पर्व मना रहे हैं. लोग अपने घरों को लौटने के लिए दूर-दूर से यात्रा कर रहे हैं. परिवारों और अपनों के एक साथ मिलकर जश्न मनाने का यह एक बहुत अच्छा अवसर है. मैं भी दिवाली मनाने के लिए आप लोगों के बीच आया हूं. जो लोग सीमाओं पर और देश के भीतर राष्ट्र की रक्षा करते हैं, जो देश के रक्षक हैं और भारत माता के वीर बेटे-बेटियां हैं, आप सभी मेरे परिवार के सदस्य हैं.
देश के जवान ही मेरे परिजन है. सभी जवान मेरे परिवार का हिस्सा हैं. जवानों के बीच दिवाली बेहद अहम है. पीएम ने कहा कि यह वह जगह है जहां कभी नक्सलवाद का बहुत ज्यादा आतंक हुआ करता था. लेकिन, आपके बलिदान और समर्पण की बदौलत, अब इसी इलाके से नक्सलवाद का खतरा खत्म हो गया है. नक्सलवाद खत्म करने में सबकी भूमिका है. देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हुआ है. देशवासी नक्सलवाद के भय से मुक्त हुआ है और विकास की एक नई लहर शुरू हो गई है. देश की सुरक्षा में जवानों की भूमिका है.
देश की सेना पर देशवासियों को गर्व है:
जवानों का त्याग, बलिदान प्रेरणा है. जवान देश की सीमाओं पर डटे हुए हैं. देश की सेना पर देशवासियों को गर्व है. देशवासियों को दीपावली की बधाई. पूरे देश की तरफ से जवानों को दीपावली की बधाई. 2026 की दिवाली वाकई बहुत खास है. 40-50 सालों बाद आपके लिए ऐसी दिवाली आई है. यह पहली ऐसी दिवाली है जब देश ने नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों से चल रही अपनी लड़ाई जीत ली है. यह पहली ऐसी दिवाली है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है. यह पहली ऐसी दिवाली है जब करोड़ों देशवासियों ने नक्सलवाद के डर को पीछे छोड़ दिया है. देश के बड़े हिस्से में नक्सलवाद था. नक्सलवादी निर्दोष लोगों को मारते थे.
माओवादी आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी:
पीएम मोदी ने कहा कि आज देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है. नामदारों ने नक्सलवाद पर कभी नहीं बोला.नामदारों को सिसकी नहीं सुनाई दी. नामदारों ने कोई चिंता नहीं दिखाई. नामदार आम लोगों की हत्या पर चुप रहे. अगर आप 2004 से 2013 के आंकड़े देखें, तो पाएंगे कि हर साल मारे गए हमारे बहादुर सैनिकों की संख्या, मारे गए नक्सलियों की संख्या से कहीं अधिक थी. दुर्भाग्य से, उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को एक लाइलाज बीमारी मान लिया और इसे ऐसे ही छोड़ दिया है. माओवादी आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी.
12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए:
पीएम ने कहा कि जब हम राष्ट्र के लिए काम करते हैं, तो हम देश में शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं. पिछले 12 वर्षों में, देश ने न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई जीती है, बल्कि गरीबी के खिलाफ भी एक बड़ी लड़ाई लड़ी है. इस साल दिवाली से ठीक पहले, कुछ दिन पहले, विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं. गरीबी हटाने के नारों के साथ जो काम दशकों तक नहीं हो पाया, उसे देश ने महज 12 वर्षों में कर दिखाया है.