जयपुर: राज्य के किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने, एआई इस्तेमाल और कम लागत में अधिक उपज की जानकारी दी जाएगी. इसके लिए कृषि विभाग ने आज निजी संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों, सिविल सोसायटीज और राष्ट्रीय संस्थानों के साथ कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की ओर से एमओयू किया. इन समझौतों से किसानों की उपज बढ़ाने और आय बढ़ोतरी के प्रयास होंगे. आखिर क्या कुछ रहेगा.
कृषि क्षेत्र में नई साझेदारी का आगाज हुआ है. कृषि एवं उद्यानिकी विभाग ने 32 प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ समझौते हस्ताक्षरित किए हैं. प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि एवं किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में यह बड़ी पहल की गई है. कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल की पहल पर किसानों के हित में यह समझौते किए गए हैं. कृषि एवं उद्यानिकी विभाग ने राज्य में कृषि क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, सिविल सोसायटी संगठनों, अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं एवं एग्रीटेक कंपनियों के साथ यह समझौते किए हैं. बड़ी बात यह है कि यह सभी समझौते गैर वित्त पोषित हैं. यानी कि इन संस्थाओं को राज्य सरकार द्वारा किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया जाएगा.
इन संस्थानों के साथ हुए MoU
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मार्केटिंग, सेवा मंदिर, प्रदान संस्था
- सेंटर फॉर माइक्रो फाइनेंस, अर्पण सेवा संस्थान
-फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी, जन चेतना संस्थान
-GVNML दूदू, ढूंढाड़ धरोहर, वाग्धारा बांसवाड़ा,
-CEEW जयपुर, मंजरी उदयपुर, सृजन संस्था, बृज फाउंडेशन
-उन्नति, IBTADA, गोयल ग्रामीण विकास संस्थान, RNFC
-IORA इकोलॉजिकल प्राइवेट लिमिटेड, मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर
- कृिमांशी टेक्नोलॉजीज जोधपुर, टिक्की एग्रो सॉल्यूशंस जयपुर
-किसान ट्रीट एग्रीटेक इंडिया हनुमानगढ़, सेलेस्टियल उदयपुर
-मेवा बाजार जयपुर, एग्राे वाहिनी अलवर, अर्थी टेल्स दिल्ली
-वेल्ट्रियोनेक्स स्मार्ट क्रिएशन्स कोटा, नर्चरिंग तत्वाज एग्रोकेयर उदयपुर
-वर्डेंट ऑटोबोट्स जयपुर संस्थाओं के साथ किए गए समझौते
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि आज कृषि क्षेत्र कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट, मृदा की उर्वरता में कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी गंभीर चुनौतियां किसानों के सामने हैं. इन चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है. सरकार के साथ अनुसंधान संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से किसानों के हित के लिए कार्य किए जा सकते हैं. समारोह में उद्यानिकी विभाग की आयुक्त श्वेता चौहान ने कहा कि इन समझौतों के जरिए कार्य करने की हर 3 माह में समीक्षा की जाएगी.
इसलिए किए गए MoU
-राज्य में प्राकृतिक खेती, जैविक खेती को बढ़ावा देना
-जलवायु अनुकूल कृषि प्रणाली, मृदा एवं जल संरक्षण पर जोर
-कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार करना
-डिजिटल कृषि, कृषि में एआई को बढ़ावा देना
-किसानों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास करने पर जोर
-महिला एवं युवा किसानों का सशक्तिकरण तथा कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना
-खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने
-प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसानों की आय में बढ़ोतरी है उद्देश्य
संस्थाओं से MoU होने के बाद कहा गया कि हर तीन माह के भीतर समीक्षा की जाएगी. उधर, मंच से संस्थाओं ने भी आश्वस्त किया कि उन्हें किसानों के साथ काम करके अच्छा लगेगा. देखने वाली बात यह रहेगी कि प्रदेश के किसानों को समझौते के बाद कितना लाभ मिल पाता है.