IIT जोधपुर का बड़ा नवाचार, AI तकनीक से पढ़ी जाएंगी हजारों साल पुरानी भारतीय पाण्डुलिपियां

जोधपुर : IIT जोधपुर ने बड़ा नवाचार किया है, AI तकनीक से हजारों साल पुरानी भारतीय पाण्डुलिपियां पढ़ी जाएंगी. प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान को संरक्षित करने के लिए अत्याधुनिक AI तकनीक विकसित हो रही है. धुंधली और क्षतिग्रस्त पाण्डुलिपियों को फिर से पठनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध हो रहा है.

IIT जोधपुर AI आधारित एडैप्टिव पाण्डुलिपि प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है. देवनागरी, शारदा, ग्रन्थ, नन्दिनागरी, मोडी और तुलु-तिगलारी सहित छह लिपियों पर काम होगा. हस्तलिखित अक्षरों की पहचान कर मशीन-पठनीय यूनिकोड में AI सिस्टम बदलेगा. 

पाण्डुलिपियों के लिप्यंतरण, भाषाई विश्लेषण और अनुवाद में भी मदद मिलेगी. गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा, दर्शन और साहित्य से जुड़े प्राचीन ज्ञान का  संरक्षण होगा. डॉ. दिनेश मोहन जोशी के नेतृत्व में महत्वपूर्ण अनुसंधान चल रहा है, ज्ञान भारतम् मिशन को मजबूती मिलेगी.