जयपुर : सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन आर्मी का दर्द समझा है. अब सरकार को जवाब देना होगा. अवैध खनन रोकते रेंजर प्रताप सिंह चूंडावत की मौत ने सिस्टम को झकझोर दिया है. जंगल बचाने वालों पर खनन माफिया, अवैध कटाई और अतिक्रमण का खतरा बढ़ रहा है.
वनकर्मी मोर्चे पर जान जोखिम में डालते रहे, सिस्टम इंतजामों पर सवालों में हैं. चंबल मामले में न्याय मित्र ने रेंजर की हत्या का दर्द कोर्ट तक पहुंचाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वन अधिकारी की मौत से मामले में गंभीरता और तात्कालिकता स्पष्ट है.सुप्रीम कोर्ट पहले ही पुलिस-वन विभाग की संयुक्त गश्त, निगरानी और सुरक्षा पर जोर दे चुका है.
अब 6 अक्टूबर को सुनवाई होगी, सरकार के सामने वनकर्मियों की सुरक्षा बड़ा सवाल है. सवाल सिस्टम से-पहले कार्रवाई होती तो क्या प्रताप सिंह की जान बचती ? अब जंगल बचाने वाली ग्रीन आर्मी को सुरक्षा देना सरकारों की पहली जिम्मेदारी हो.